हृदय रोग से बचाव के लिए जोखिम की समय रहते पहचान जरूरी : डॉ. संतोष कुमार
कानपुर, 04 अक्टूबर (हि.स.)। हृदय रोग से बचाव के लिए केवल लक्षणों का इंतजार करने के बजाय बीमारी के जोखिम का समय रहते आकलन करना जरूरी है। बदलती जीवनशैली, बढ़ते कोलेस्ट्रॉल, रक्तचाप और मधुमेह को नियंत्रित करने के साथ शुरुआती स्तर पर हृदय की धमनियों में होने वाले बदलावों की पहचान कर गंभीर खतरे को कम किया जा सकता है। यह बातें हार्ट केयर सेंटर के वरिष्ठ प्रिवेंटिव एंड क्लिनिकल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. संतोष कुमार ने रविवार को आयोजित हृदय रोग जन जागरूकता गोष्ठी में कहीं।
डॉ. संतोष कुमार ने कहा कि एथेरोस्क्लेरोसिस यानी धमनियों में वसा या प्लाक जमा होने की प्रक्रिया उम्र बढ़ने तक सीमित नहीं है। यह कम उम्र में भी शुरू होकर लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षण के बढ़ सकती है। धूम्रपान से दूरी, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ खानपान के साथ कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को नियंत्रित रखने से इसके बढ़ने की गति कम की जा सकती है। उन्होंने कहा कि हार्ट अटैक भले ही अचानक दिखाई देता है, लेकिन इसके पीछे चल रही बीमारी को विकसित होने में कई वर्ष लग सकते हैं।
उन्होंने बताया कि हृदय-रक्त वाहिका संबंधी जोखिम अधिक होने पर उपचार भी उसी के अनुरूप तय किया जाता है। ऐसे मरीजों में एलडीएल-सी को 70 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से कम और रक्तचाप को 130/80 एमएमएचजी से नीचे रखने का लक्ष्य रखा जाता है। जरूरत के अनुसार स्टेटिन, एस्पिरिन और रक्तचाप नियंत्रित करने वाली दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। कम जोखिम वाले लोगों में जीवनशैली में बदलाव को प्राथमिकता दी जाती है।
डॉ. संतोष ने बताया कि लक्षण सामने आने से पहले शुरुआती ब्लॉकेज का पता लगाने के लिए वैस्कुलर अल्ट्रासाउंड से कैरोटिड प्लाक की जांच, सीटी मशीन से कोरोनरी आर्टरी कैल्शियम (सीएसी) स्कोर और सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी जैसी जांच उपयोगी हो सकती हैं।
गोष्ठी में कंसल्टेंट इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. उत्कर्ष कुमार ने आधुनिक इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी की उपयोगिता पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस तकनीक से हार्ट अटैक के बाद लगाए गए स्टेंट की स्थिति और उसके सही तरह से काम करने का आकलन किया जा सकता है। वहीं, हृदय के वाल्व के सिकुड़ने जैसी समस्याओं में कई मामलों में इंटरवेंशनल तकनीक से उपचार संभव हुआ है, जिससे कुछ मरीजों को ओपन हार्ट सर्जरी से बचाया जा सकता है।
गोष्ठी में विशेषज्ञों ने कार्डियोवैस्कुलर जोखिम का आकलन, हृदय रोग की समय रहते पहचान और आधुनिक इंटरवेंशन की जरूरत पर विस्तार से चर्चा की। उपस्थित लोगों को हृदय को स्वस्थ रखने और गंभीर बीमारियों से बचाव के उपायों की जानकारी दी गई। अंत में विशेषज्ञों ने कहा कि नियमित जांच और समय पर विशेषज्ञ परामर्श से हृदय रोग के खतरे को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
हिन्दुस्थान समाचार / अजय सिंह