साधुओं के अमृत ज्ञान सत्संग से मिलते चार फल - धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की होती है प्राप्ति
महोबा, 14 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में संत कबीर अमृतवाणी सत्संग समिति के द्वारा रविवार को कबीर आश्रम में सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बुद्धिजीवियों ने काव्य रचनाओं के माध्यम से सामाजिक बुराइयों को खत्म कर राष्ट्र कल्याण की कामना से कार्य करने की अपील की। सत्संग में निस्वार्थ भाव से जनकल्याण की प्रार्थना की गई।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और कबीर के अमृत वचनों से लाभान्वित हुए।
जनपद मुख्यालय के मुहाल कटकुलवा पुरा स्थित कबीर आश्रम में भव्य सत्संग कार्यक्रम आयोजित हुआ। कबीर वंदना, जय कबीर, जय गुरु कबीरा के जयघोष के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
साईं डिग्री कॉलेज के प्राचार्य व समिति प्रमुख डॉ. एलसी अनुरागी ने तीरथ गए ते एक फल, संत मिले फल चार। सदगुरु मिले अनेक फल, कहै कबीर विचार की विस्तार से व्याख्या की।
उन्होंने कहा कि तीरथ जाने से केवल एक फल यानी शरीर शुद्धि का फल मिलता है, जबकि सच्चे साधुओं के अमृत भरे ज्ञान के सत्संग से चार फल धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। सदगुरु के मिलने से अनंत फल मिलते हैं।
कार्यक्रम में वरिष्ठ कवि हरिश्चन्द्र वर्मा ने अपनी रचना के माध्यम से दुनिया को शांति का मार्ग दिखाया और कबीर शब्द सागर में प्रेम की ज्योति जलाने का आह्वान किया।
पं. हरीशंकर नायक ने कहा कि सत्य से बढ़कर कोई धर्म नहीं और झूठ से बढ़कर कोई पाप नहीं। पं. जगदीश रिद्धारिया ने दरनि दे घनश्याम शरण मेरी आंखियां प्यासी रे भजन सुनाकर भक्तिमय माहौल बना दिया। साध्वी सुनीता अनुरागी ने कबीर के विचारों को समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त करने में सहायक बताया।
मंच संचालन करते हुए पं. मधुरेश अवस्थी 'गुड्डू' ने बिन सत्संग विवेक न होई पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम में पं. आशाराम तिवारी, राजाराम रिद्धारिया ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में रामऔतार सैन, विनोद, पप्पू सैन, हरप्रसाद समेत अन्य मौजूद रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / उपेन्द्र द्विवेदी