हजारों श्रद्धालुओं ने की मां नेरी सेमरी की लट्ठ पूजा, लाठियां बरसाकर की श्रद्धा व्यक्त

 


मथुरा, 27 मार्च(हि.स.)। छाता क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां राज-राजेश्वरी मंदिर (नरी-सेमरी) में शुक्रवार को आस्था, परम्परा और शौर्य का अद्भुत संगम देखने को मिला। यहां नरी-साखी गांव के हजारों श्रद्धालुओं ने पारम्परिक ‘लठ्ठ पूजा’ के तहत मंदिर परिसर में लाठियां बरसाकर माता के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

इस अनूठी परम्परा की शुरुआत नरी गांव से निकली भव्य शोभायात्रा के साथ हुई। गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों और “जय माता दी“ के जयकारों के बीच हजारों ग्रामीण हाथों में लाठियां लेकर पैदल सेमरी स्थित मंदिर पहुंचे। पूरे मार्ग में भक्तिमय माहौल बना रहा।

--मंदिर परिसर में गूंजी लाठियों की आवाज मंदिर पहुंचते ही श्रद्धालुओं ने परम्परा के अनुसार लाठियां बरसानी शुरू कर दीं। लाठियों की तड़तड़ाहट से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा। यह दृश्य देखने के लिए आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। परम्परा के पीछे का इतिहास ग्रामीण कमल ठाकुर के अनुसार, यह परम्परा सदियों पुराने एक विवाद से जुड़ी है। मंदिर के अधिकार और सेवा को लेकर सिसोदिया और जादौन समाज के बीच संघर्ष हुआ था, जिसमें जादौन समाज की विजय हुई। उसी जीत की स्मृति और माता के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए तब से हर वर्ष ‘लठ्ठ पूजा’ का आयोजन किया जाता है।

--शक्ति और श्रद्धा का प्रतीक है लठ्ठ पूजा ग्रामीणों के अनुसार, लाठियां बरसाना किसी प्रकार की हिंसा का प्रतीक नहीं, बल्कि अपनी शक्ति को मां के चरणों में अर्पित करने और विजय उत्सव मनाने की परम्परा है। नरी सेमरी माता रानी मंदिर में यदुवंशी जादौन समाज ने विशेष लट्ठ पूजा की, जिसमें बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। पारम्परिक और भव्य पूजा के दौरान माता के जयकारे और ’जय यदुवंश’ के नारे लगाए गए। यह पूजा शौर्य और एकता का प्रतीक है, जो यदुवंशी जादौन समाज की प्राचीन परम्पराओं का हिस्सा है।

पूजा के दौरान भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात रहा और समापन पर सभी को प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर मुरारी प्रधान, भारती, गंगा मास्टर, नथोल, यशपाल मास्टर, अजय सिंह यदुवंशी आदि सैकड़ों यदुवंशी समाज के लोग मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / महेश कुमार