मूल्यांकन से दो दिन पूर्व की उपस्थिति का शिक्षकों को मिले पारिश्रमिक : धर्मेंद्र यादव
जौनपुर, 16 मार्च (हि.स.)। यूपी के जौनपुर में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (नवीन) के प्रांतीय अध्यक्ष धर्मेंद्र यादव ने सोमवार को जौनपुर शहर के विभिन्न मूल्यांकन केंद्रों का दौरा कर शिक्षकों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने माध्यमिक शिक्षा परिषद की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि शिक्षकों के अधिकारों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जरूरत पड़ी तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि 12 मार्च को यूपी बोर्ड की परीक्षाएं समाप्त होने के बाद माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज के सचिव द्वारा 18 मार्च से एक अप्रैल तक हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का कार्यक्रम घोषित किया गया है। इसके लिए प्रदेश भर में कुल 249 मूल्यांकन केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें जौनपुर भी शामिल है।धर्मेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि इन मूल्यांकन केंद्रों पर कार्यरत हजारों शिक्षकों को परीक्षक और अंकेक्षक के रूप में नियुक्त नहीं किया गया है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि किसी एक केंद्र की शिकायत या किसी अन्य कारण से पूरे प्रदेश के शिक्षकों को मूल्यांकन कार्य से वंचित करना उचित नहीं है। संगठन ने मांग की कि इस निर्णय पर पुनर्विचार करते हुए मूल्यांकन केंद्रों के शिक्षकों को भी परीक्षक के रूप में शामिल किया जाए।उन्होंने यह भी कहा कि मूल्यांकन कार्य शुरू होने से दो दिन पहले यानी 16 और 17 मार्च को केवल हस्ताक्षर के लिए शिक्षकों को 50-60 किलोमीटर दूर केंद्रों पर बुलाना तानाशाही रवैये को दर्शाता है। इससे शिक्षकों को भीषण गर्मी में अनावश्यक यात्रा करनी पड़ती है और आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है।संगठन ने मांग की है कि मूल्यांकन से दो दिन पूर्व की उपस्थिति को भी मूल्यांकन ड्यूटी मानते हुए शिक्षकों को उचित पारिश्रमिक दिया जाए। धर्मेंद्र यादव ने कहा कि संगठन एक सप्ताह तक परिषद के सचिव के निर्णय का इंतजार करेगा, उसके बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। इस दौरान संगठन के कई जिला पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / विश्व प्रकाश श्रीवास्तव