विशेष ग्रसित बच्चों के उपचार में थेरेपी की भूमिका अहम, जागरूकता जरूरी : डॉ. नरेंद्र पांडेय
कानपुर, 29 मार्च (हि.स.)। डाउन सिंड्रोम, सेरेब्रल पाल्सी, एडीएचडी और ऑटिज्म से ग्रसित बच्चों के उपचार में समय पर पहचान और नियमित थेरेपी बेहद जरूरी है। सही मार्गदर्शन और निरंतर प्रयास से इन बच्चों की शारीरिक और मानसिक स्थिति में सुधार लाया जा सकता है। अभिभावकों को भी प्रशिक्षित करना आवश्यक है, ताकि वे घर पर बच्चों की बेहतर देखभाल कर सकें। ऐसे आयोजनों से न केवल जागरूकता बढ़ती है बल्कि विशेषज्ञों के अनुभवों का लाभ भी मिलता है, यह बातें रविवार को आयोजन समिति के संयोजक डॉ. नरेंद्र पांडेय ने कहीं।
मोतीझील स्थित प्रमिला सभागार में आज कुसुम जनकल्याण समिति और दीपिका फिजियोथेरेपी एवं चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि डॉ. वीएन त्रिपाठी ने अन्य अतिथियों के साथ दीप प्रज्वलित कर की।
सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे विशेषज्ञों ने डाउन सिंड्रोम, सेरेब्रल पाल्सी, एडीएचडी और ऑटिज्म से ग्रसित बच्चों के उपचार और देखभाल से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की। इस दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि नियमित थेरेपी और सही परामर्श से बच्चों की शारीरिक व मानसिक स्थिति में सुधार संभव है।
विशेषज्ञों ने फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी और स्पीच थेरेपी की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन माध्यमों से बच्चों को दैनिक जीवन में आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलती है। साथ ही अभिभावकों को प्रशिक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों, फिजियोथेरेपिस्ट, ऑक्यूपेशनल विशेषज्ञों और विभिन्न चिकित्सकों ने भाग लेकर अपने विचार साझा किए।
उन्होंने बताया कि कानपुर में ऐसे बच्चों के लिए तीन विशेष केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां उपचार के साथ अभिभावकों को प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप