जनपद की गोशालाओं के बीच होगी स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, उत्कृष्ट गोशालाओं को मिलेगा सम्मान एवं पुरस्कार
लखनऊ, 29 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में गोवंश संरक्षण को और प्रभावी बनाते हुए गोशालाओं को व्यवस्थित, उत्कृष्ट, आत्मनिर्भर एवं उत्पादक केंद्रों के रूप में विकसित करने की दिशा में उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग द्वारा कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसी क्रम में बुधवार काे आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता, उपाध्यक्ष अतुल सिंह एवं महेश शुक्ल तथा सदस्य राजेश सिंह सेंगर, रमाकांत उपाध्याय एवं दीपक गोयल ने गोशालाओं के समग्र विकास एवं किसानों को गो-आधारित प्राकृतिक कृषि से जोड़ने के संबंध में विचार-विमर्श किया।
बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रत्येक जनपद की गोशालाओं के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के आधार पर विशेष मूल्यांकन एवं प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसमें गोशालाओं की व्यवस्थाओं, वैज्ञानिक प्रबंधन, स्वच्छता, गोवंश के स्वास्थ्य एवं पोषण, नस्ल संवर्धन, दुग्ध उत्पादन, जनसहभागिता तथा आत्मनिर्भरता के प्रयासों को प्रमुख आधार बनाया जाएगा। उत्कृष्ट गोशालाओं को सम्मान एवं पुरस्कार प्रदान कर उनके सफल मॉडलों को अन्य गोशालाओं के लिए प्रेरणा के रूप में विकसित किया जाएगा।
मूल्यांकन में वर्षभर हरे चारे की उपलब्धता, भूसा-चोकर का उचित प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण पशु आहार पर निर्माण एवं उपयोग की अंतिम तिथि का उल्लेख, नर-मादा एवं बछड़े-बछियों का वैज्ञानिक वर्गीकरण, नस्ल संवर्धन एवं दुग्ध उत्पादन को शामिल किया जाएगा। नर गोवंश के लिए पृथक नंदीशाला तथा चयनित नंदियों के माध्यम से वैज्ञानिक प्रजनन व्यवस्था को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
गोवंश के बेहतर स्वास्थ्य के लिए सिंक वार्ड, नियमित चिकित्सा, कमजोर गोवंश एवं छोटे बछड़े-बछियों के लिए पृथक देखभाल, कम ऊंचाई की पानी की नांद एवं भोजन व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा। गोवंश की संख्या के अनुरूप शेड, स्वच्छता, चूना युक्त पानी, बाउंड्री, रजिस्टर, सीसीटीवी तथा सफाईकर्मियों एवं केयरटेकर के लिए आवश्यक सुविधाओं को भी मूल्यांकन का हिस्सा बनाया जाएगा।
आयोग का लक्ष्य गोशालाओं को केवल संरक्षण केंद्र तक सीमित न रखते हुए उत्पादक एवं आत्मनिर्भर इकाइयों के रूप में विकसित करना है। इसके लिए बायोगैस संयंत्र, गोबर एवं गोमूत्र का वैज्ञानिक उपयोग, जैविक खाद एवं अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही आसपास के किसानों को गो-आधारित प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।
गोशालाओं की उत्कृष्टता के मूल्यांकन में स्वस्थ एवं दूध पीने वाले बछड़े-बछियों की संख्या को भी महत्वपूर्ण सकारात्मक मानक बनाया जाएगा। उत्कृष्ट गोशालाओं को आयोग की टीम अथवा स्थानीय जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सम्मानित कर पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग का उद्देश्य है कि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा एवं उत्कृष्ट प्रबंधन के माध्यम से प्रदेश की गोशालाओं में गोवंश संरक्षण, स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता एवं आत्मनिर्भरता के बेहतर मानक विकसित हों और सफल मॉडलों को अन्य गोशालाओं तक पहुंचाया जा सके।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. जितेन्द्र पाण्डेय