मठिया में रुद्र महायज्ञ के चौथे दिन रामलीला का भव्य मंचन, राम-सीता मिलन और धनुष भंग प्रसंग ने बांधा समां
गोरखपुर, 26 अक्टूबर (हि.स.)। जनपद के ग्रामसभा मठिया स्थित शिव मंदिर परिसर में आयोजित श्री श्री 108 श्री रुद्र महायज्ञ के अवसर पर रामलीला मंचन के चौथे दिन श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। महाराजगंज से आए गणपति सरकार के कलाकारों ने भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन कर उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कलाकारों के सजीव अभिनय, प्रभावशाली संवाद और आकर्षक प्रस्तुति ने रामायण के प्रसंगों को मंच पर जीवंत कर दिया। रामलीला देखने के लिए गांव और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं श्रद्धालु पहुंचे।
महायज्ञ के धार्मिक वातावरण के बीच आयोजित रामलीला ने आयोजन को विशेष आकर्षण प्रदान किया। मंचन के दौरान श्रद्धालु भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों को श्रद्धापूर्वक देखते रहे। कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से धर्म, सत्य, मर्यादा, गुरु के प्रति सम्मान और कर्तव्यनिष्ठा जैसे मूल्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। रामलीला के विभिन्न दृश्यों के दौरान दर्शकों में उत्साह दिखाई दिया और पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा।
महर्षि विश्वामित्र के साथ वन यात्रा और अहिल्या उद्धार का मंचन
रामलीला में महर्षि विश्वामित्र के अयोध्या पहुंचने और भगवान श्रीराम तथा लक्ष्मण को अपने साथ ले जाने के प्रसंग का मंचन किया गया। महर्षि विश्वामित्र द्वारा दोनों राजकुमारों को अपने साथ ले जाने और उन्हें धर्म तथा कर्तव्य के मार्ग पर आगे बढ़ाने की कथा को कलाकारों ने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। इसके बाद यात्रा के दौरान घटित विभिन्न प्रसंगों को मंच पर उतारा गया।
अहिल्या उद्धार के प्रसंग ने दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। भगवान श्रीराम के चरण स्पर्श से अहिल्या के उद्धार की कथा को भावपूर्ण अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। इस प्रसंग के जरिए कलाकारों ने भगवान श्रीराम की करुणा, उदारता और लोककल्याणकारी स्वरूप को दर्शाया। रामायण के इस प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भक्ति और आस्था से जोड़ने के साथ यह संदेश भी दिया कि भगवान श्रीराम का जीवन मानवता, करुणा और धर्म की रक्षा के आदर्शों से परिपूर्ण है।
इसके बाद गंगा यात्रा और जनकपुर की ओर प्रस्थान से जुड़े प्रसंगों का मंचन किया गया। कलाकारों ने कथा के क्रम को आगे बढ़ाते हुए दर्शकों को रामायण की घटनाओं से परिचित कराया। मंच पर प्रस्तुत प्रत्येक दृश्य के साथ रामलीला का वातावरण और अधिक भक्तिमय होता गया।
जनक वाटिका में राम-सीता का प्रथम मिलन बना आकर्षण
रामलीला के चौथे दिन का प्रमुख आकर्षण जनकपुर की जनक वाटिका में भगवान श्रीराम और माता सीता के प्रथम मिलन का प्रसंग रहा। कलाकारों ने इस दृश्य को मर्यादा और सौम्यता के साथ प्रस्तुत किया। माता सीता द्वारा मां गिरिजा की पूजा और भगवान श्रीराम के दर्शन से जुड़े प्रसंग ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
जनक वाटिका के दृश्य में कलाकारों की प्रस्तुति ने रामायण की उस पावन कथा को साकार कर दिया, जिसमें भगवान श्रीराम और माता सीता के जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय सामने आता है। इस प्रसंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को भारतीय संस्कृति में निहित आदर्शों, संयम, मर्यादा और श्रद्धा का संदेश मिला। दर्शक पूरे मनोयोग से मंचन देखते रहे और कलाकारों के अभिनय की सराहना करते नजर आए।
सीता स्वयंवर और शिव धनुष भंग पर गूंजे जय श्रीराम के जयकारे
रामलीला में इसके बाद राजा जनक द्वारा आयोजित सीता स्वयंवर का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। स्वयंवर में भगवान शिव के विशाल धनुष को उठाने की चुनौती और विभिन्न राजाओं के प्रयासों के बाद महर्षि विश्वामित्र की आज्ञा से भगवान श्रीराम द्वारा धनुष भंग किए जाने का दृश्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष भंग करने के प्रसंग को कलाकारों ने प्रभावशाली संवादों और अभिनय के साथ प्रस्तुत किया। जैसे ही धनुष भंग का दृश्य मंचित हुआ, रामलीला परिसर जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ भगवान श्रीराम का स्मरण किया। इस दृश्य ने रामलीला देखने पहुंचे लोगों में विशेष उत्साह भर दिया।
सीता स्वयंवर का प्रसंग केवल एक धार्मिक कथा नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम की शक्ति, विनम्रता और मर्यादा का प्रतीक भी है। कलाकारों ने इस प्रसंग को प्रस्तुत करते हुए दर्शकों को रामायण की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्ता से परिचित कराया।
रामलीला के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंच रही धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा
ग्रामीणों और श्रद्धालुओं की रही सहभागिता
रामलीला मंचन के चौथे दिन रामनारायण मल्ल, सरवन सिंह, बलिराम यादव, मंटू यादव, दुर्विजय यादव, सूरज नाथ सिंह, मदन सिंह, गिरधारी पाण्डेय, अशोक सिंह, रमेश सिंह, जोगिंदर मल्ल, जयदीप निषाद (पिंटू), प्रहलाद निषाद, सुदर्शन निषाद, विकास सिंह, लखेंद्र गुप्ता, अमन सिंह, राजेश गुप्ता, नकुल यादव, अंगद निषाद, राजकुमार निषाद, विशाल चौधरी, सोनू चौधरी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
श्री श्री 108 श्री रुद्र महायज्ञ के अवसर पर आयोजित रामलीला ने ग्रामसभा मठिया में धार्मिक उत्साह और भक्तिमय वातावरण को और अधिक सशक्त बनाया। भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों के मंचन के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, मर्यादा, करुणा और आदर्श जीवन का संदेश मिला।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय