नाले के जल शोधन से निर्मल होगी राप्ती नदी की धारा
--10 एमएलडी क्षमता की बन रही एसटीपी, नदी में सीवेज प्रवाह रोकने को 27 एमएलडी का एमपीएस
--53 करोड़ रुपये की परियोजना के मार्च माह के अंत तक पूर्ण होने की उम्मीद
गोरखपुर, 18 मार्च (हि.स.)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशानुरूप राप्ती नदी की धारा को अविरल बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना आगामी मानसून से पहले ही पूरी हो जाएगी। महेवा-कटनिया नाले के इंटरसेप्शन, डायवर्जन व ट्रीटमेंट की परियोजना में 92 प्रतिशत कार्य हो चुका है और इसी मार्च माह के अंत तक इसके पूरी तरह पूर्ण हो जाने की उम्मीद है। नाले के इंटरसेप्शन, डायवर्जन और ट्रीटमेंट के लिए सरकार 53 करोड़ रुपये खर्च कर रही है।
वर्षों से शहर का सीवेज महेवा और कटनिया जैसे बड़े नालों के जरिये सीधे राप्ती नदी में मिलता रहा। अब नदी में मिलने वाले नालों पर इंटरसेप्शन, डायवर्जन और ट्रीटमेंट की परियोजनाओं को लागू किया जा रहा है। राप्ती में जो नाले गिरते हैं उनमें से महेवा-कटनिया नाला भी महेवा, रुस्तमपुर एवं महुईसुघरपुर वार्ड के करीब पचास हजार की आबादी के उपभोग किए जल और सीवेज को नदी में उड़ेलता है। अब महेवा-कटनिया नाले के पानी को नदी में गिरने से पहले ही इंटरसेप्ट (रोक) किया जाएगा और पाइपलाइनों के जरिए एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) तक डायवर्ट किया जाएगा।
डायवर्ट किए पानी व सीवेज के ट्रीटमेंट के लिए कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश जल निगम नगरीय की तरफ से 10 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और 27 एमएलडी क्षमता के मास्टर पम्पिंग स्टेशन (एमपीएस) का निर्माण भी किया जा रहा है। इससे पानी के शोधित होने के बाद ही नदी में डिस्चार्ज किया जाएगा। मानसून से पहले इस परियोजना के क्रियाशील होने पर बारिश के मौसम में नदी में जाने वाले अतिरिक्त कचरे को नियंत्रित किया जा सकेगा।
कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश जल निगम के अधिशासी अभियंता पंकज कुमार बताते हैं कि महेवा-कटनिया नाले के इंटरसेप्शन, डायवर्जन व ट्रीटमेंट की परियोजना पर काम 29 दिसम्बर 2023 को शुरू हुआ था। अब तक करीब 92 प्रतिशत कार्य कराया जा चुका है। परियोजना को बरसात से पहले, मई अंत तक शत प्रतिशत पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि प्रगति को देखते उम्मीद है कि इसी माह (मार्च) के अंत तक इसे पूर्ण कर लिया जाएगा।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय