सिहाईजपार में गूंजेगा जय श्रीराम, 07 मई को प्रभु राम दरबार की प्राण-प्रतिष्ठा में शामिल होंगे चंपत राय
गोरखपुर, 22 अप्रैल (हि.स.)। गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन पर स्थित सिहाईजपार गांव आगामी 07 मई 2026 को एक ऐसे ऐतिहासिक और भव्य धार्मिक आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है, जिसकी गूंज दूर-दूर तक सुनाई देगी। गांव में नव-निर्मित प्रभु श्रीराम दरबार की भव्य प्राण-प्रतिष्ठा होगी और इस आयोजन को लेकर सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण खबर यह है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, अयोध्या के महासचिव चंपत राय ने अपनी पूरी टीम के साथ समारोह में शामिल होने की सहमति दे दी है। इस सूचना के सामने आते ही क्षेत्र में उत्साह, श्रद्धा और तैयारियों का वातावरण और प्रखर हो गया है।
अयोध्या में प्रभु श्रीराम मंदिर निर्माण से जुड़े सबसे प्रमुख चेहरों में शामिल चंपत राय की उपस्थिति से इस आयोजन की गरिमा कई गुना बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन इस पूरे महाआयोजन के केंद्र में जिस व्यक्तित्व की संकल्पशक्ति, आस्था और प्रतिबद्धता सबसे अधिक दिखाई दे रही है, वह नाम है शाही ग्लोबल हॉस्पिटल के निदेशक, समाजसेवी और बाबा गरीब नाथ सेवा संस्थान, सिहाईजपार के अध्यक्ष डॉ. शिवशंकर शाही का।
डॉ. शिवशंकर शाही ने अपने पैतृक गांव सिहाईजपार की प्राचीन धार्मिक विरासत को नई आभा देने का जो संकल्प लिया, अब वह मूर्त रूप में सामने आने लगा है। गोरखपुर से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में हजारों वर्ष प्राचीन प्रभु श्रीराम दरबार, बजरंगबली मंदिर तथा बाबा गरीब नाथ यानी भगवान शंकर का प्राचीन मंदिर लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र रहे हैं। इन प्राचीन देवस्थलों के जीर्णोद्धार और पुनरुत्थान का बीड़ा डॉ. शाही ने जिस श्रद्धा और समर्पण के साथ उठाया, उसी का परिणाम है कि पहले चरण में प्रभु श्रीराम का भव्य रामदरबार बनकर तैयार हो चुका है और अब उसकी प्राण-प्रतिष्ठा 7 मई को सुनिश्चित की गई है। क्षेत्र में चर्चा है कि डॉ. शिवशंकर शाही ने इस आयोजन को केवल एक धार्मिक कार्यक्रम न मानकर गांव की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक अस्मिता से जोड़ दिया है।
डॉ. शिवशंकर शाही ने कहा कि यह आयोजन मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के साथ समाज को जोड़ने, लोगों में संस्कार जगाने, आस्था को ऊर्जा देने और सनातन चेतना को सशक्त करने का महाअभियान है। उन्होंने कहा कि आज जब समाज के भीतर द्वेष, ईर्ष्या, तनाव, भ्रम और असामाजिक प्रवृत्तियां तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही हैं, तब ऐसे धार्मिक आयोजन समाज को स्थिरता, शांति और नई दिशा देने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा उसकी सनातन परंपरा में बसती है और यही परंपरा हमें वसुधैव कुटुम्बकम्, सहअस्तित्व, सद्भाव और लोकमंगल का संदेश देती है। सिहाईजपार का यह आयोजन उसी सनातन भावधारा को पुनः प्रखर करने का प्रयास है।
डॉ. शाही ने यह भी कहा कि गांव की मिट्टी, गांव की परंपरा और देवस्थलों की गरिमा को पुनर्जीवित करना उनका नैतिक और आध्यात्मिक दायित्व है। उन्होंने समस्त क्षेत्रवासियों, धर्मप्रेमियों और श्रद्धालुओं से इस सप्ताहव्यापी आयोजन में सपरिवार शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि जो लोग इन पावन दिनों में कुछ समय भी इस आध्यात्मिक वातावरण में बिताएंगे, उनके मन से नकारात्मकता दूर होगी और जीवन में नई ऊर्जा, नई शांति तथा नई सकारात्मकता का संचार होगा। आयोजन समिति ने उम्मीद जताई है कि डॉ. शिवशंकर शाही की पहल और मार्गदर्शन में होने वाला यह महोत्सव न केवल धार्मिक दृष्टि से ऐतिहासिक साबित होगा, बल्कि सिहाईजपार को पूर्वांचल के एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र के रूप में नई पहचान भी देगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय