सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर कंपनी सील, आग लगने से एक व्यक्ति की हुई थी मौत, 37 हुए थे घायल
नोएडा, 18 मार्च (हि.स.)। जिला प्रशासन ने सेक्टर-4 स्थित बिजली मीटर बनाने वाली फैक्ट्री में आग लगने के मामले में बुधवार को सख्त कार्रवाई की। कारखाना विभाग ने सुरक्षा नियमों की अनदेखी सामने आने पर कंपनी को सील कर दिया। वहां चल रही सभी निर्माण और उत्पादन गतिविधियों को तुरंत प्रभाव से बंद करा दिया। फैक्ट्री में 12 मार्च की सुबह करीब पांच बजे आग लग गई थी। उस समय फैक्ट्री में करीब 200 मजदूर काम कर रहे थे। मजदूरों ने सबसे पहले स्टोर एरिया के पास धुआं उठता देखा। देखते ही देखते आग की लपटें तेज हो गईं और पूरे इलाके में फैल गईं।
मजदूरों ने अपने स्तर पर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग पर काबू नहीं पाया जा सका। इसके बाद तुरंत पुलिस की इमरजेंसी सेवा 112 और दमकल विभाग को सूचना दी गई। सूचना मिलने के बाद दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं थी और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया। आग इतनी भयंकर थी कि उसे पूरी तरह बुझाने में करीब चार दिन लग गए। इस हादसे में एक मजदूर की मौत हो गई, जबकि 37 मजदूर घायल हो गए थे। इनमें से 33 मजदूरों को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है, जबकि कुछ मजदूरों का इलाज अब भी चल रहा है।
श्रम विभाग और कारखाना निदेशालय की टीम ने बुधवार को संयुक्त रूप से फैक्ट्री का निरीक्षण किया। जांच में कई गंभीर लापरवाही सामने आईं। अधिकारियों ने बताया कि फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। जांच में पता चला कि फैक्ट्री की इमारत में दो बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर, पहला और दूसरा तल बना हुआ था। इसके अलावा छत पर टीन शेड लगाकर अतिरिक्त स्टोर भी बनाया गया था। फैक्ट्री प्रबंधन ने अग्निशमन विभाग से एनओसी लेने के लिए गलत जानकारी दी थी। परिसर के चारों ओर जरूरी खाली जगह (सेटबैक) भी नहीं छोड़ी गई थी। इससे आग लगने जैसी आपात स्थिति में दमकल की गाड़ियों को अंदर पहुंचने में दिक्कत हुई। निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि फैक्ट्री में कई जगहों पर आपातकालीन निकास मार्ग बंद थे। स्मोक डिटेक्टर सही तरीके से काम नहीं कर रहे थे। इसके अलावा प्रबंधन बिजली से जुड़ी सुरक्षा जांच की नियमित रिपोर्ट भी नहीं दिखा सका।
रसायन के लिए नहीं था स्टोर:
अधिकारियों ने बताया कि फैक्ट्री में करीब 50 टन पॉलीकार्बोनेट और लगभग 200 लीटर ज्वलनशील रसायन रखा गया था, लेकिन इन्हें सुरक्षित तरीके से स्टोर नहीं किया गया था। यही नहीं, फैक्ट्री में नियमित फायर ड्रिल और सुरक्षा ऑडिट भी नहीं किया जा रहा था। जांच के अनुसार आग लगने की मुख्य वजह शॉर्ट सर्किट, पुरानी और खराब वायरिंग, तय सीमा से ज्यादा बिजली का इस्तेमाल और अग्नि सुरक्षा उपकरणों की खराब स्थिति रही।
कारखाना विभाग के सहायक निदेशक रामबहादुर ने बताया कि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन मिलने पर फैक्ट्री को सील कर दिया गया। आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुरेश चौधरी