श्रीश्री राधा वृन्दावन चंद्र का 20वां प्राकट्योत्सव हर्ष उल्लास के साथ मनाया गया, दूर-दूर से आए श्रद्धालु
श्रीराम मय हुआ वृन्दावन चंद्रोदय मंदिर
मथुरा, 27 मार्च (हि.स.)। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के पावन अवसर पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के अवतरण दिवस (राम नवमी) को वृन्दावन चंद्रोदय मंदिर के भक्तों द्वारा श्रीश्री राधा वृन्दावन चंद्र के 20वें प्राकट्योत्सव के रूप में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।
मंदिर परिसर को भव्य पुष्प सज्जा से अलंकृत किया गया, जहां सुसज्जित फूल बंगला भक्तों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। इस अवसर पर श्रीविग्रहों का वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य महाभिषेक संपन्न हुआ। भगवान को 56 प्रकार के दिव्य भोग अर्पित किए गए। साथ ही श्रीराम तारक यज्ञ, हरिनाम संकीर्तन एवं महाआरती का दिव्य एवं भव्य आयोजन किया गया, जिससे संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो उठा।
इस अवसर पर चंद्रोदय मंदिर के अध्यक्ष चंचलापति दास ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए रामचरितमानस का संदर्भ देते हुए कहा “राम कृष्ण दोऊ एक हैं, अंतर नहीं निमेष। उनके नयन गंभीर हैं, इनके चपल विशेष। ”उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण में कोई वास्तविक भेद नहीं है। भगवान श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में धर्म, सत्य, करुणा और कर्तव्यपालन के आदर्श प्रस्तुत करते हैं, जबकि भगवान श्रीकृष्ण लीला पुरुषोत्तम के रूप में प्रेम, आनंद और दिव्य लीलाओं के माध्यम से भक्तों का मार्गदर्शन करते हैं। आध्यात्मिक दृष्टि से दोनों एक ही परम तत्व के भिन्न-भिन्न स्वरूप हैं।
उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति, सेवा और समर्पण भाव के साथ भाग लिया। श्रीराम नाम के संकीर्तन से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान रहा। इस पावन अवसर पर मथुरा, आगरा, लखनऊ, दिल्ली, नोएडा, जयपुर, भरतपुर आदि विभिन्न शहरों से बड़ी संख्या में भक्त एवं श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और उत्सव का लाभ प्राप्त किया।
हिन्दुस्थान समाचार / महेश कुमार