तकनीक से बेहतर होगा शिक्षण, शिक्षक की भूमिका अहम : सत्यकी राय
कानपुर, 18 सितंबर (हि.स.)। डिजिटल तकनीक शिक्षण को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है, लेकिन शिक्षक के विवेक, संवेदनशीलता और व्यक्तिगत उपस्थिति का स्थान नहीं ले सकती। प्रभावी शिक्षण में शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रहेगी। यह बातें आईआईटी कानपुर के डिजाइन विभाग के प्रमुख और डीएलसीसीएआई कार्यक्रम के शैक्षणिक प्रमुख प्रो. सत्यकी राय ने कार्यक्रम के विस्तार के अवसर पर कहीं।
आईआईटी कानपुर ने उत्तर प्रदेश सरकार और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के सहयोग से डिजिटल साक्षरता एवं कम्प्यूटेशनल थिंकिंग अवधारणाएं कार्यक्रम का विस्तार माध्यमिक शिक्षा तक किया है। इसके तहत 900 माध्यमिक विद्यालय शिक्षकों, डाइट प्रवक्ताओं और एससीईआरटी से संबद्ध अधिकारियों को डिजिटल साक्षरता, कम्प्यूटेशनल थिंकिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तकनीक आधारित शिक्षण का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कार्यक्रम 150-150 प्रतिभागियों के छह बैच में आठ सप्ताह तक चलेगा। शुरुआत में आईआईटी कानपुर में पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण होगा। इसमें डिजिटल उपकरण, स्प्रेडशीट, गूगल वर्कस्पेस, साइबर सुरक्षा, ब्लॉक आधारित प्रोग्रामिंग, पायथन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की प्रारंभिक जानकारी दी जाएगी। इसके बाद ऑनलाइन प्रशिक्षण, साप्ताहिक मार्गदर्शन और सवाल-जवाब सत्र होंगे। अंतिम चरण में दो दिवसीय परियोजना प्रदर्शन और प्रस्तुति कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। निर्धारित गतिविधियां पूरी करने वाले प्रतिभागियों को आईआईटी कानपुर और एससीईआरटी की ओर से संयुक्त प्रमाणपत्र दिया जाएगा।
प्रशिक्षण में ऐसे शिक्षकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिन्हें कंप्यूटर, कोडिंग या कृत्रिम बुद्धिमत्ता का पूर्व अनुभव नहीं है। उन्हें पाठ और नोटिस तैयार करने, अंकपत्र व प्रस्तुतियां बनाने, मूल्यांकन और डिजिटल शिक्षण सामग्री तैयार करने जैसे दैनिक कार्यों में तकनीक के इस्तेमाल का अभ्यास कराया जाएगा। चैटजीपीटी, गूगल क्लासरूम और खान अकादमी जैसे डिजिटल मंचों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
कार्यक्रम में रोबोटिक्स को भी शामिल किया गया है। प्रतिभागियों को रोबोट संयोजन और सेंसर आधारित गतिविधियों का अभ्यास कराया जाएगा। रोबोटिक्स चुनौती के जरिए समस्या समाधान और जिज्ञासा आधारित सीखने को बढ़ावा दिया जाएगा। कार्यक्रम समन्वयक प्रो. रामकुमार जे. ने कहा कि कोडिंग, कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब केवल इंजीनियरिंग संस्थानों तक सीमित नहीं हैं। माध्यमिक स्तर से विद्यार्थियों में समस्या समाधान और नवाचार की सोच विकसित करना जरूरी है। वहीं, आउटरीच गतिविधियां कार्यालय के प्रभारी प्रो. विमल कुमार ने कहा कि आईआईटी कानपुर परिसर से बाहर भी ज्ञान और तकनीकी समझ के प्रसार को अपनी जिम्मेदारी मानता है।
आईआईटी कानपुर के अनुसार इससे पहले 750 प्राथमिक विद्यालय शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिससे 10 हजार से अधिक विद्यार्थियों तक तकनीक आधारित शिक्षण पहुंचा। डीएलसीसीएआई का पाठ्यक्रम एससीईआरटी की कक्षा छह से आठ तक की पुस्तकों में शामिल है और इससे प्रदेश के करीब 48 लाख विद्यार्थियों तक पहुंच बनी है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप