शिक्षक भर्ती मामले में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने किया विधानसभा के सामने प्रदर्शन
लखनऊ, 22 अप्रैल (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में 69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में एक बार फिर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने लखनऊ में अपनी मांगों को लेकर विधानसभा के सामने बुधवार को प्रदर्शन किया। विधानसभा के सामने तैनात पुलिस बल ने अभ्यर्थियों को जबरन बस में बैठा कर धरना स्थल इको गार्डन छोड़ दिया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि इस प्रकरण पर सरकार कोई पहल नहीं कर रही। इस कारण से मामला लटकता चला जा रहा। इस प्रकरण की पहली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में सितंबर माह 2024 में हुई थी। उसके बाद से लगातार तारीख पर तारीख मिल रही है।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे धनंजय गुप्ता ने बताया की इस प्रकरण के निस्तारण के लिए सरकार की ओर से कोई पहल नहीं की जा रही है। इसके चलते सुप्रीम कोर्ट में डेट नहीं लग रही। इस प्रकरण पर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट, मुख्यमंत्री द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट और लखनऊ हाई कोर्ट की डबल बेंच का फैसला, सब हमारे पक्ष में है लेकिन फिर भी हमारे साथ न्याय नहीं किया जा रहा है। कारण, हम पिछड़े और दलित समाज से आते हैं। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट के अनुसार लगभग 19 हजार पदों का नुकसान हुआ है। वहीं सरकार ने हम अभ्यर्थियों की 6800 की सूची भी जारी की लेकिन नियुक्ति नहीं दी। उन्हाेंने कहा कि हम आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी पिछले लगभग छह वर्ष से लगातार संघर्ष करते आ रहे हैं। सरकार से मांग करते हैं लेकिन हमारी बात नहीं सुनी जा रही। सुनवाई न होने से सभी अभ्यर्थी आहत हैं। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में तीन सप्ताह का समय मांगा था जो पूर्ण हो चुका है। अपना पक्ष सरकार रख नहीं रही है। हम सब की मांग है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखे और मामले का जल्द निस्तारण कराये।
हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन