टीबी के गंभीर मरीजों के लिए होना चाहिए अलग आईसीयू : डॉ. सूर्यकान्त
टीबी आईसीयू कमेटी के चेयरमैन बने डॉ. सूर्यकान्त
लखनऊ, 07 मई (हि.स.)। ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) के वे गंभीर मरीज, जिन्हें आईसीयू की आवश्यकता होती है, उन्हें जनरल आईसीयू में नहीं रखा जा सकता है। इससे अन्य मरीजों में भी बीमारी फैलने का खतरा रहता है। इसलिए टीबी मरीजों के लिए विशेष रूप से निर्मित आईसीयू की आवश्यकता होती है। यह जानकारी किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्याल के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकान्त ने गुरूवार को दी।
डॉ. सूर्यकान्त ने हिन्दुस्थान समाचार को बताया कि टीबी के वे रोगी, जिनका ऑक्सीजन स्तर 90 प्रतिशत से कम होता है, उन्हें टीबी आईसीयू की आवश्यकता होती है। कुछ महीने पहले स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार ने एक आदेश पारित किया है कि देश के प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में टीबी आईसीयू सुविधा युक्त कम से कम एक बेड अवश्य होना चाहिए। लेकिन इस दिशा में अभी काम नहीं हुआ है।
आईसीयू बनाने की गाइड लाइन तैयार करेंगे: डा.सूर्यकांत
डा. सूर्यकांत को “टीबी कमिटेड आईसीयू” हेतु स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) एवं गाइडलाइन तैयार करने के लिए गठित राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति का चेयरमैन बनाया गया है। यह समिति राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीइपी), स्वास्थ मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत कार्य करेगी गम्भीर टीबी मरीजों के उपचार के लिए आईसीयू बनाने की मानक प्रणाली विकसित करेगी।
केजीएमयू की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानन्द ने टीबी कमिटेड आईसीयू हेतु गठित राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति के चेयरमैन बनाए जाने पर डॉ. सूर्यकान्त को बधाई दी है। डॉ. सूर्यकान्त राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम, नॉर्थ जोन टास्क फोर्स (उत्तर प्रदेश के 9 राज्यों के लिए) के चेयरमैन के रूप में भी कार्य कर रहे हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन