गौ माता की रक्षा की बात करना राजनीति नहीं बल्कि आस्था: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

 


कानपुर देहात, 31 मई (हि. स.)। गौ संरक्षण के मुद्दे को लेकर गविष्ठी यात्रा पर निकले ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती रविवार काे उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले के पुखरायां पहुंचे हैं। यहां उन्हाेंने एक बार फिर भाजपासरकारों और राजनीतिक दलों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि गौ माता की रक्षा की बात करना राजनीति नहीं बल्कि आस्था, धर्म और संस्कृति की रक्षा का विषय है।

पुखरायां स्थित गौशाला और मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचने पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का श्रद्धालुओं और गौभक्तों ने स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने गौ संरक्षण और गौ माता के सम्मान को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति गाय को माता मानता है, वही उनके सामने आकर इस विषय पर चर्चा करे। शंकराचार्य ने कहा कि कुछ लोग गौ रक्षा की बात को राजनीति से जोड़ रहे हैं, जबकि गाय करोड़ों लोगों की आस्था, धर्म और संस्कृति का केंद्र है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि अपनी मां की रक्षा करना राजनीति नहीं है, तो गौ माता की रक्षा की आवाज उठाना राजनीति कैसे हो सकती है।

उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि जनता के वोट से बनी सरकारें गाय को केवल पशु मान रही हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व की सरकारों से लोगों को शिकायत थी, लेकिन जिन लोगों ने खुद को गौभक्त और हिंदुत्व का समर्थक बताया, उनके शासन में भी गाय की स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया

अपने संबोधन के दौरान शंकराचार्य ने पश्चिम बंगाल की राजनीति का भी उल्लेख किया। उन्होंने बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के कथित बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि गाय को माता माना जाता है तो उसके संरक्षण को लेकर किसी प्रकार का विरोधाभास नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि गौ माता के सम्मान और सुरक्षा पर स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए।

शंकराचार्य ने जनता से गौ संरक्षण के लिए आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में गौ रक्षा का मुद्दा प्रमुख जन मुद्दा बनेगा और समाज को इस विषय पर अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।

हिन्दुस्थान समाचार / अवनीश अवस्थी

हिन्दुस्थान समाचार / अवनीश अवस्थी