संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने से होता है स्वाइन फ्लू : डाॅ. आशुतोष दुबे

 


लखनऊ, 25 अगस्त (हि.स.)। स्वाइन फ्लू एक तीव्र संक्रामक श्वसन रोग है, जो मुख्य रूप से इन्फ्लूएंजा ए (एच 1 एन 1 ) वायरस के कारण होता है। स्वाइन फ्लू संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने से होता है। यह जानकारी डाॅ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (सिविल) अस्पताल के चेस्ट रोग विशेषज्ञ डाॅ. आशुतोष दुबे ने दी।

डाॅ. आशुतोष दुबे ने बताया कि स्वाइन फ्लू सुअर का पका हुआ मांस खाने से नहीं फैलता है। यह एक भ्रांति है। उन्होंने बताया कि दरवाजे के हैंडल, मेज, उपकरण) को छूने के बाद बिना हाथ धोए नाक, मुंह या आंखों को छूने से भी यह फैलता है। वायरस के संपर्क में आने से लक्षण दिखने तक एक से चार दिन (औसतन दो दिन) लगते हैं। इसको इनक्यूबेशन पीरियड कहते हैं। संक्रामकता की अवधि लक्षण शुरू होने के एक दिन पहले से लेकर पांच से सात दिनों तक संक्रमित मरीज से वायरस फैलता है।

स्वाइन फ्लू के लक्षण

-अचानक तेज बुखार

-सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई या घरघराहट

-लगातार सूखी खांसी आना व गले में खराश

-सीने में लगातार दर्द या दबाव,

-गंभीर सिरदर्द, अत्यधिक थकान,

-मांसपेशियों में तेज दर्द,

-चक्कर आना, उल्टी और दस्त का आना

-लगातार उल्टी के कारण डीहाइड्रेशन का होना आदि।

गर्भवती महिलाओं को स्वाइन फ्लू का अधिक खतरा

डाॅ. आशुतोष दुबे ने बताया कि पांच वर्ष से कम आयु के बच्चे और 65 वर्ष से अधिक आयु के वृद्ध, गर्भवती महिलाएं, अस्थमा, हृदय रोग, अनियंत्रि मधुमेह, किडनी रोग या कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली के रोगियों में बीमारी होने का अधिक खतरा रहता है। आरटी पीसीआर (रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन-पॉलीमरेज चेन रिएक्शन) टेस्ट से स्वाइन फ्लू की बीमारी की पुष्टि का सबसे विश्वसनीय टेस्ट है। इसके लिए नेजोफेरिंजियल या ऑरोफेरिंजियल स्वाब से किया जाता है। रैपिड इन्फ्लूएंजा डायग्नोस्टिक टेस्ट त्वरित परिणाम देता है। परंतु इसकी संवेदनशीलता आरटी पीसीआर से कम होती है।

रोकथाम एवं बचाव के उपाय

फ्लू वैक्सीन से वार्षिक टीकाकारण करना, मजबूत सुरक्षा चक्र प्रदान करता है। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को टिश्यू पेपर या कोहनी से ढकें, मास्क लगाए, सभी लोग श्वसन शिष्टाचार का पालन करना। साबुन-पानी से 20 सेकंड तक नियमित हाथ धोएं या एल्कोहल-युक्त सैनिटाइज़र का उपयोग करें, हाथों की और व्यक्तिगत स्वच्छता का पालन करें। लक्षण दिखने पर कम से कम सात दिन या बुखार पूरी तरह से उतरने के 24 घंटे बाद तक खुद को आइसोलेट रखें।

हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन