अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए पदयात्रा कर रही भाजपा : स्वामी प्रसाद मौर्य
सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने, युवाओं-किसानों की अनदेखी और सरकारी संपत्तियां बेचने का लगाया आरोप, प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्रियों से मांगा इस्तीफा
लखनऊ, 05 नवंबर (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की केंद्र और राज्यों की सरकारें हर मोर्चे पर विफल साबित हुई हैं। अपनी नाकामियों और जनविरोधी नीतियों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए अब पदयात्राओं का सहारा लिया जा रहा है। यह आरोप अपनी जनता पार्टी (अजपा) के अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने भाजपा सरकार पर लगाए।
स्वामी प्रसाद मौर्य गुरुवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गोमतीनगर स्थित अपने आवास पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रधानमंत्री और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की।
उन्होंने आरोप अलगाया कि मौजूदा शासन में लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त पर भाजपा के पक्ष में काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने ईवीएम के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जनता के मतों का सम्मान सुनिश्चित होना चाहिए।
युवाओं की स्थिति पर चिंता जताते हुए मौर्य ने कहा कि रोजगार देने के वादे पूरे नहीं हुए हैं। आउटसोर्सिंग और संविदा व्यवस्था के विस्तार से युवाओं के भविष्य पर अनिश्चितता बढ़ी है। सरकारी भर्तियों में भ्रष्टाचार और पेपर लीक की घटनाओं ने नौजवानों का भरोसा तोड़ा है। उनका आरोप था कि स्थायी सरकारी नौकरियों के अवसर सीमित कर युवाओं को असुरक्षित रोजगार व्यवस्था की ओर धकेला जा रहा है।
किसानों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि धान समेत अन्य फसलों की सरकारी खरीद में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं। कई क्रय केंद्रों के प्रभावी ढंग से काम नहीं करने के कारण किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की आय और उनकी उपज के उचित मूल्य से जुड़े वादों को पूरा करने में विफल रही है।
मौर्य ने सार्वजनिक उपक्रमों और सरकारी संपत्तियों के निजीकरण पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और बस अड्डों जैसी सार्वजनिक परिसंपत्तियां चुनिंदा उद्योगपतियों के हित में सौंपी जा रही हैं। उन्होंने अडानी समूह का नाम लेते हुए कहा कि इस तरह के फैसले देश की सार्वजनिक संपत्तियों पर आम जनता के अधिकारों को कमजोर करते हैं।
भाजपा पर सामाजिक विभाजन की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि जनता के बुनियादी सवालों से ध्यान हटाने के लिए हिंदू-मुस्लिम और जातिगत मुद्दों को उछाला जा रहा है। उन्होंने मौजूदा सरकारों को 'डबल इंजन' के नाम पर प्रचार करने वाली सरकारें बताते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याओं और भ्रष्टाचार से लोगों को राहत नहीं मिल रही है।
विपक्षी एकजुटता के सवाल पर मौर्य ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में सभी विपक्षी दलों को साझा मुद्दों पर एकजुट होकर संघर्ष करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के दुश्मन नहीं हैं। उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि वैचारिक स्तर पर भाजपा की नीतियों के विरोध में है। उन्होंने विपक्ष से आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर लोकतांत्रिक मूल्यों और जनहित के मुद्दों पर संघर्ष तेज करने की अपील की।
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हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन