गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने तक जारी रहेगा अभियान: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
हाथरस, 11 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद हाथरस में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने और देशभर में गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगने तक उनका अभियान निरंतर जारी रहेगा। गुरुवार को अपनी गविष्ठि यात्रा के दौरान हाथरस के सादाबाद पहुंचे शंकराचार्य ने लोगों को गौ संरक्षण का संकल्प दिलाते हुए जन-जन तक इस संदेश को पहुंचाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर आयाेजित सभा में उन्होंने गौ माता और मानव के संबंध को भावनात्मक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से समझाया। उन्होंने कहा कि मां का अपने बच्चे के प्रति प्रेम ‘वात्सल्य’ कहलाता है। यह शब्द ‘वत्स’ अर्थात बछड़ा या बछिया से बना है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार गाय अपने बछड़े के प्रति वात्सल्य भाव रखती है, उसी प्रकार मानव माता अपने बच्चों से प्रेम करती है। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में गाय को माता का दर्जा प्राप्त है।
शंकराचार्य ने कहा कि ‘मां’ शब्द भी हमें गौवंश से ही मिला है। जब बछड़ा भूख लगने पर अपनी मां को पुकारता है तो वह ‘मां’ जैसी ध्वनि निकालता है। आज भी मनुष्य अपनी माता को इसी शब्द से संबोधित करता है। उन्होंने कहा कि यदि हमारी माता हमें बछड़ा-बछिया समझकर प्रेम करती है तो हमारा भी गौ माता से स्वाभाविक और आत्मीय संबंध है। इसलिए गौ माता की रक्षा करना प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य है। उन्होंने उपस्थित लोगों से गौ संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा कि समाज को इस विषय पर सजग रहना होगा। यदि हम गौ माता से विमुख हो गए तो मातृत्व और वात्सल्य के उस भाव से भी दूर हो जाएंगे, जो भारतीय संस्कृति की पहचान है।
गविष्ठि यात्रा के दौरान पूर्व विधायक देवेंद्र अग्रवाल , रानू ससोदिया, राकेश तेनुआ ने समर्थकों के साथ जगद्गुरु का स्वागत एवं सम्मान किया। वहीं न्यायालय प्रांगण के सामने आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में भागवताचार्य पुलिन बिहारी शास्त्री तथा कथा आयोजकों ने भी उनका अभिनंदन किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ बसपा नेता डॉ. अविन शर्मा ने भी शंकराचार्य का स्वागत कर उनका सम्मान किया। यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गौभक्त उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / मदन मोहन राना