स्वदेशी और आत्मनिर्भरता की भावना आज भी प्रासंगिक: राकेश मिश्रा

 


कानपुर, 29 सितंबर (हि.स.)। खादी और ग्रामोद्योग से जुड़े उत्पाद भारतीय परंपरा और संस्कृति के प्रतीक होने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ाते हैं। स्वदेशी और आत्मनिर्भरता की यह भावना आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। यह बातें मंगलवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के कुलसचिव राकेश मिश्रा ने खादी ग्रामोद्योग एवं स्वयं सहायता समूहों की प्रदर्शनी के उद्घाटन के दौरान कही।

विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग की ओर से गांधी जयंती सेवा अभियान के तहत 29 सितंबर को विशेष प्रदर्शनी आयोजित की गई। इसका उद्देश्य महात्मा गांधी के स्वदेशी, स्वावलंबन, ग्रामोद्योग, श्रम की गरिमा और आत्मनिर्भरता के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के साथ स्थानीय उत्पादों और स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहित करना रहा।

प्रदर्शनी में विभिन्न खादी ग्रामोद्योग इकाइयों और स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। विद्यार्थियों, शिक्षकों और विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और स्थानीय व स्वदेशी उत्पादों में रुचि दिखाई।

कार्यक्रम का संचालन शिक्षा विभाग की निदेशक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. तनुजा भट्ट के मार्गदर्शन में हुआ। संयोजन शिक्षा विभाग की सह-निदेशक डॉ. स्नेह पांडेय ने किया।

इस अवसर पर प्रो. डॉ. रश्मि गोरे, प्रो. कृष्ण कांत त्रिपाठी, डॉ. गोपाल सिंह, डॉ. प्रियंका मौर्य, डॉ. विमल सिंह, डॉ. रतनार्थु, डॉ. बद्री नारायण मिश्र, डॉ. कल्पना अग्निहोत्री, डॉ. अनुपमा यादव, शिवचरण सिंह पटेल, डॉ. आरके सैनी, श्रीमती प्रिया तिवारी और डॉ. कुलदीप सिंह चौहान मौजूद रहे।

प्रदर्शनी के माध्यम से विद्यार्थियों में स्वदेशी, सामाजिक उत्तरदायित्व, आत्मनिर्भरता और सेवा भावना को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया। साथ ही स्थानीय उत्पादों को अपनाने और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में भागीदारी का आह्वान किया गया।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप