चीनी उद्योग को सतत और लाभकारी बनाने के लिए वैश्विक तकनीक अपनानी होगी : प्रो नरेंद्र मोहन
कानपुर, 21 अप्रैल (हि.स.)। चीनी उद्योग को भविष्य के लिए टिकाऊ और लाभकारी बनाने हेतु नई किस्मों का विकास, वैज्ञानिक खेती, मशीनीकरण और आधुनिक तकनीकों को अपनाना जरूरी है, तभी उत्पादन बढ़ेगा और उद्योग मजबूत होगा। यह बातें मंगलवार को राष्ट्रीय शर्करा संस्थान के पूर्व निदेशक प्रोफेसर नरेंद्र मोहन ने कही।
उत्तर प्रदेश शुगर मिल्स एसोसिएशन (यूपीएसएमए) द्वारा 21 और 22 मई को लखनऊ में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय चीनी सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। “चीनी उद्योग: भविष्य के लिए सतत विकास का मार्ग” विषय पर होने वाला यह सम्मेलन लखनऊ के होटल में आयोजित होगा, जिसमें भारत सहित कई देशों के विशेषज्ञ और उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधि भाग लेंगे।
प्रेस वार्ता में जानकारी देते हुए यूपीएसएमए के मुख्य सलाहकार प्रोफेसर नरेंद्र मोहन और महासचिव दीपक गुप्ता ने बताया कि सम्मेलन में थाईलैंड, नेपाल, श्रीलंका, ब्राजील, अमेरिका और जर्मनी समेत विभिन्न देशों के करीब 350 प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह सम्मेलन वैश्विक स्तर पर चीनी उद्योग के अनुभवों, चुनौतियों और नई तकनीकों को साझा करने का महत्वपूर्ण मंच बनेगा।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में गन्ने के कम उत्पादन के चलते वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश में चीनी उत्पादन घटकर लगभग 90 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। जबकि पिछले वर्ष यह करीब 92.45 लाख मीट्रिक टन था। इसके पीछे गन्ने की उन्नत किस्मों की कमी एक प्रमुख कारण है। ऐसे में सम्मेलन के दौरान नई और उन्नत किस्मों के विकास, वैज्ञानिक खेती, मशीनीकरण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग से उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
सम्मेलन में एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम, वैश्विक चीनी संतुलन, घरेलू मांग और निर्यात जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विस्तृत चर्चा होगी। इसके साथ ही हरित ऊर्जा, सतत विमानन ईंधन, पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों और बदलते वैश्विक बाजार के अनुरूप उद्योग को ढालने के उपायों पर मंथन किया जाएगा।
इसके अलावा चीनी मिलों के सह-उत्पादों और अपशिष्ट से जैव ऊर्जा, जैव रसायन और अन्य मूल्यवान उत्पाद तैयार करने की संभावनाओं पर भी चर्चा होगी, जिससे उद्योग की आय बढ़ाई जा सके। विभिन्न क्षेत्रों की जरूरतों के अनुसार अलग-अलग गुणवत्ता की चीनी के उत्पादन और उसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने पर भी विचार किया जाएगा।
सम्मेलन के साथ एक प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी, जिसमें 30 से अधिक स्टॉल लगाए जाएंगे। इनमें नवीनतम मशीनों, तकनीकों और नवाचारों का प्रदर्शन किया जाएगा। देश-विदेश के विशेषज्ञों के व्याख्यान होंगे, साथ ही उद्योग में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को “शुगर भूषण” जैसे पुरस्कारों से सम्मानित भी किया जाएगा।
इस आयोजन में शोध संस्थानों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रहेगी, जिससे चीनी उद्योग के समग्र विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। आयोजकों का मानना है कि यह सम्मेलन उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश के चीनी उद्योग के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप