दर्शन ही जीवन है और जीवन ही दर्शन: आचार्य एसके सेठ
-ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज में स्टडी सर्किल सिरीज
प्रयागराज, 28 मार्च (हि.स)। दर्शनशास्त्र जीवन को जागरूक, अर्थपूर्ण और गहन बनाता है। यह हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है। सच्चा दार्शनिक न केवल सोचता है, बल्कि उसी सोच के अनुसार जीता भी है। इसीलिए कहा जाता है कि दर्शन ही जीवन है और जीवन ही दर्शन है।
यह बातें भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित और ईश्वर शरण पीजी कॉलेज के दर्शनशास्त्र विभाग एवं आईक्यूएसी के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को आयोजित स्टडी सर्किल सीरीज के अंतर्गत ‘दर्शन ही जीवन है’ विषय पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष आचार्य एस के सेठ ने कही।
आचार्य एस के सेठ ने कहा कि वर्तमान शैक्षणिक परिदृश्य में विज्ञान और तकनीकी के प्रभाव और दवाब में दर्शनशास्त्र की परिधि अत्यंत संकुचित हो रही है, जो नितांत चिंतनीय स्थिति है। यद्यपि दर्शनशास्त्र एक रोजगारपरक विषय नहीं है फिर भी यह जीवन की वास्तविक, व्यापक और गंभीर समझ के लिए नितांत आवश्यक अनुशासन है।
उन्होंने आगे कहा कि प्रारम्भिक ग्रीक चिंतकों प्लेटो और अरस्तू ने दर्शन को व्यापक संदर्भों में ग्रहण करते हुए इसे समस्त अनुशासनों का उद्गम स्रोत माना। वस्तुतः जीवन केवल शारीरिक अस्तित्व या भौतिक सुख नहीं है, बल्कि गहन विचार, सत्य की खोज, नैतिक मूल्यों और ब्रह्मांड की समझ पर आधारित है। हमें सवाल पूछने की क्षमता देता है कि हम कौन हैं ? जीवन का उद्देश्य क्या है ? सही और गलत में क्या अंतर है ? बिना दर्शन के जीवन यांत्रिक अंधा और खोखला बन जाता है।
महाविद्यालय के पीआरओ डॉ. मनोज कुमार दूबे ने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आनंद शंकर सिंह ने की। स्वागत वक्तव्य शोधार्थी आशी मिश्रा ने दिया और कार्यक्रम की रूपरेखा प्रो. अमिता पांडेय ने प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन आशी मिश्रा और शालिनी सिंह और धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम संयोजिका प्रो. अमिता पांडेय ने किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय संघटक महाविद्यालयों के शिक्षकों, विद्वज्जनों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों ने सहभागिता की।
हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र