ग्रामीण शिविर में छात्रों ने समझीं गांव की जमीनी हकीकत, सामाजिक व संसाधन मानचित्रण का किया अभ्यास
कानपुर, 27 अप्रैल (हि.स.। “ग्रामीण शिविर के माध्यम से छात्रों को समाज की वास्तविक परिस्थितियों को समझने और समुदाय के साथ सीधे जुड़कर सीखने का अवसर मिलता है। सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन जैसी तकनीकों का अभ्यास उन्हें भविष्य में बेहतर सामाजिक कार्यकर्ता बनने में मदद करेगा।” यह बातें सोमवार को डॉ. किरन झा ने कही।
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ आर्ट्स, ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेस के समाज कार्य विभाग द्वारा ग्रामीण शिविर का आयोजन किया गया। इसके अंतर्गत एमएसडब्ल्यू के छात्र-छात्राओं ने बरहट बंगर, बिठूर गांव का भ्रमण कर सामाजिक और आर्थिक स्थिति का अध्ययन किया।
छात्र-छात्राएं विश्वविद्यालय परिसर से बस द्वारा रवाना होकर निर्धारित स्थान पर पहुंचे, जहां उन्हें समूहों में विभाजित किया गया। प्रत्येक समूह को गांव की अलग-अलग दिशा—उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम—का जिम्मा दिया गया, ताकि वे क्षेत्र का विस्तृत अध्ययन कर सकें। हर समूह के साथ एक-एक संकाय सदस्य भी मौजूद रहा, जिन्होंने पूरे अभ्यास के दौरान मार्गदर्शन दिया।
शिविर के दौरान सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन (PRA) की प्रमुख तकनीकों जैसे सामाजिक मानचित्रण और संसाधन मानचित्रण का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया। छात्रों ने गांव के निवासियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं, उपलब्ध संसाधनों और जीवन स्तर की जानकारी जुटाई।
इस अवसर पर कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सत्येंद्र एस. चौहान, डॉ. एस.पी. वर्मा, डॉ. अजय प्रताप सिंह, डॉ. बुशरा बरकाती और डॉ. उर्वशी सहित अन्य संकाय सदस्यों ने भी मार्गदर्शन दिया। यह ग्रामीण शिविर एमएसडब्ल्यू पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप