संघर्ष, संतुलन और सफलता: नायब तहसीलदार नेहा राय बनीं बिहार की एसडीएम

 






बीपीएससी में 16वीं रैंक लाकर नेहा 30 की उम्र में रचा इतिहास, पीएचडी, एसआरएफ और प्रशासनिक सेवा-तीनों में संतुलन की मिसाल

गोरखपुर, 21 जून (हि.स.)। सफलता केवल वर्षों तक एक ही लक्ष्य पर टिके रहने से नहीं, बल्कि सही दिशा में निरंतर और संतुलित प्रयास से मिलती है। इसका सशक्त उदाहरण गोरखपुर सदर तहसील में तैनात नायब तहसीलदार नेहा राय हैं। बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की परीक्षा में 16वीं रैंक हासिल कर उन्होंने एसडीओ/एसडीएम पद पर चयनित होकर अपनी प्रतिभा और मेहनत का लोहा मनवाया है।

लगभग 30 वर्ष की उम्र में मिली यह सफलता इस बात को भी स्पष्ट करती है कि उनका सफर केवल “तैयारी करते रहने” का नहीं रहा, बल्कि लगातार आगे बढ़ते रहने का रहा है। नेहा ने अपनी पढ़ाई, शोध और करियर—तीनों को साथ लेकर चलने का कठिन लेकिन प्रेरक रास्ता चुना।

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर सदर तहसील की निवासी नेहा राय एक साधारण किसान परिवार से आती हैं। उनके पिता बृजेश कुमार राय खेती कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। मां के असमय निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारियों के बीच पली-बढ़ी नेहा ने कठिन परिस्थितियों को कभी अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया।

नेहा वर्तमान में पीएचडी कर रही हैं और यह भी उतना ही महत्वपूर्ण तथ्य है कि देश में पीएचडी पूरी करने में लंबा समय और गहरा धैर्य लगता है। शोध कार्य केवल पढ़ाई नहीं, बल्कि निरंतर अध्ययन, फील्डवर्क, लेखन और धैर्य की परीक्षा होता है। ऐसे में पीएचडी के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना आसान नहीं होता, लेकिन नेहा ने यह संतुलन बनाकर दिखाया।

उन्होंने एसआरएफ (सीनियर रिसर्च फेलोशिप) भी क्वालिफाई किया है, जिसके तहत उन्हें केंद्र सरकार से लगभग 50,000 रुपये प्रतिमाह की फेलोशिप मिल रही है। यह इस बात का प्रमाण है कि वह अपने अकादमिक क्षेत्र में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। यानी उनका सफर सिर्फ नौकरी पाने की तैयारी नहीं, बल्कि ज्ञान और शोध में भी निरंतर आगे बढ़ने का रहा है।

नेहा ने खुद यह स्पष्ट किया कि उन्होंने केवल बैठकर वर्षों तक तैयारी नहीं की, बल्कि पीएचडी के साथ-साथ अवसरों को आजमाया। जब बीपीएससी में सफलता मिली, तो उन्होंने प्रशासनिक सेवा को जॉइन किया। यह निर्णय उनकी व्यावहारिक सोच और स्पष्ट लक्ष्य को दर्शाता है।

गोरखपुर सदर तहसील में नायब तहसीलदार के रूप में कार्य करते हुए भी उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और अंततः यह सफलता हासिल की।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर तहसील परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपनी सफलता की जानकारी एसडीएम सदर दीपक गुप्ता को दी। इसके बाद वहां मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों ने खुशी जताते हुए उन्हें बधाई दी, मुंह मीठा कराया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

नेहा राय ने यूपीपीएससी 2025 की मुख्य परीक्षा भी दी है और इसके परिणाम को लेकर उन्हें उम्मीद है। साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि उनका अकादमिक करियर-विशेषकर प्रोफेसर बनने की दिशा में अब भी खुला है। यानी उनके सामने प्रशासनिक सेवा और शिक्षा जगत, दोनों क्षेत्रों में आगे बढ़ने के अवसर मौजूद हैं।

नेहा की यह कहानी आज के युवाओं के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि करियर एक रेखीय रास्ता नहीं है। अगर इच्छाशक्ति और अनुशासन हो, तो एक साथ कई क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल की जा सकती है।

यह सफलता केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि सोच का बदलाव है, जहां एक बेटी किसान परिवार से निकलकर प्रशासनिक सेवा, शोध और शिक्षा -तीनों क्षेत्रों में अपनी मजबूत पहचान बना रही है। नेहा राय ने यह साबित कर दिया है कि अगर हौसले बुलंद हों, तो रास्ते खुद बनते चले जाते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय