मिलेट्स से पोषण की ओर कदम: विश्वविद्यालय की सराहनीय पहल

 










गोरखपुर, 13 अप्रैल (हि.स.)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हुए ‘मिलेट पुनरुद्धार कार्यक्रम’ के अंतर्गत खोराबार क्षेत्र के पथरा स्थित मिडिल स्कूल में मंडुआ (रागी) बिस्किट वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद, लखनऊ के वित्तीय सहयोग से सम्पन्न हुआ।

मुख्य अतिथि प्रो. राजर्षि गौर ने विश्वविद्यालय की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम न केवल बच्चों के स्वास्थ्य को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि मिलेट्स के उत्पादन और उपभोग को भी बढ़ावा देते हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के समग्र विकास के लिए भी प्रतिबद्ध है। उन्होंने बच्चों को देश का भविष्य बताते हुए कहा कि मंडुआ (रागी) जैसे पोषक अनाज के प्रति जागरूकता बढ़ाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय अपने शोध कार्यों के माध्यम से किसानों को मिलेट्स के उत्पादन हेतु प्रेरित कर रहा है।

कार्यक्रम में विशिष्ट वक्ता प्रो. राम रतन सिंह ने मोटे अनाजों के स्वास्थ्य लाभों पर प्रकाश डाला। वहीं, वनस्पति विज्ञान विभाग के डॉ. रामवंत गुप्ता ने बताया कि रागी में दूध की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक कैल्शियम पाया जाता है, जो बच्चों के विकास के लिए अत्यंत लाभकारी है।

सामाजिक कार्यकर्ता हरेंद्र राय एवं रेड क्रॉस सोसायटी के चेयरमैन शिवेंद्र विक्रम सिंह ने भी मिलेट्स के महत्व पर जोर देते हुए इसके उत्पादन और उपयोग को बढ़ाने की आवश्यकता बताई।

कार्यक्रम का संचालन ज्ञानेंद्र ओझा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रधानाध्यापिका सत्यवती देवी ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षकगण, शोधार्थी एवं लगभग 150 छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय