औषधि वाटिका में स्थापित होगी महर्षि सुश्रुत और उनके शिष्यों की मूर्तियां : डॉ. वंदना पाठक

 


कानपुर, 07 जून (हि.स.)। महर्षि सुश्रुत और उनके शिष्यों की मूर्तियों की स्थापना केवल भारतीय चिकित्सा परंपरा के सम्मान का प्रतीक नहीं होगी, बल्कि यह आयुर्वेद के ज्ञान, शोध और चिकित्सा विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी बनेगी। औषधि वाटिका में बनने वाली कुटी को प्रेरणा केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां लोग महर्षि सुश्रुत के योगदान से परिचित हो सकेंगे। यह बातें रविवार को नीमा वुमेन्स फोरम उत्तर प्रदेश की सचिव एवं वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्या डॉ. वंदना पाठक ने कहीं।

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) परिसर स्थित औषधि वाटिका में महर्षि सुश्रुत और उनके शिष्यों की मूर्तियों की स्थापना के लिए रविवार को फाउंडेशन एवं कुटी निर्माण का भूमिपूजन और शिलान्यास किया गया। यह कार्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक की प्रेरणा और मार्गदर्शन में कराया जा रहा है।

डॉ. वंदना पाठक ने कहा कि प्रस्तावित कुटी केवल एक प्रदर्शनी स्थल नहीं होगी, बल्कि आयुर्वेद की प्राचीन ज्ञान परंपरा और भारतीय चिकित्सा विज्ञान की विरासत को जन-जन तक पहुंचाने का केंद्र बनेगी। उन्होंने बताया कि कुटी के भीतर महर्षि सुश्रुत की प्रतिमा के साथ औषधि निर्माण, रोगोपचार और चिकित्सा कार्यों में संलग्न उनके शिष्यों की मूर्तियां भी स्थापित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि यह पहल आयुर्वेद और विशेष रूप से शल्य चिकित्सा से जुड़े चिकित्सकों के लिए गौरव का विषय होगी।

इन मूर्तियों का निर्माण विश्वविद्यालय के फाइन आर्ट्स विभाग के विद्यार्थियों द्वारा जूतिबली यादव और डॉ. राज कुमार सिंह के मार्गदर्शन में किया गया है। विश्वविद्यालय के निदेशक डॉ. मिठाई लाल ने विद्यार्थियों द्वारा तैयार की जा रही मूर्तियों का अवलोकन किया और उनकी सृजनात्मकता, मेहनत तथा कलात्मक कौशल की सराहना की।

कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने इस पहल को विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। इस अवसर पर राकेश मिश्रा, सुभाष तिवारी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने अपने संदेश में कहा कि इस प्रकार की परियोजनाएं विद्यार्थियों को अपनी कलात्मक प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ भारतीय सांस्कृतिक और वैज्ञानिक विरासत से जुड़ने का अवसर प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि यह पहल आयुर्वेद, चिकित्सा इतिहास और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साथ ही आगामी महर्षि सुश्रुत जयंती के अवसर पर चिकित्सा शिविर आयोजित करने की भी योजना है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप