बार-बार बीमार होना यानी शरीर की प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर : सतीश राय
प्रयागराज, 01 जनवरी (हि.स.)। मनुष्य का बार-बार संक्रमित होना और बीमार पड़ना शरीर की प्रतिरक्षा तंत्र के कमजोर होने का लक्षण है। यदि मौसम बदलते ही हर बार बीमार पड़ते हैं तो यह गंभीर और अदृश्य बीमारी के होने की सूचना शरीर आपको दे रही है, इसे अनदेखा न करें।
यह बातें गुरुवार को एसकेआर योग एवं रेकी शोध प्रशिक्षण और प्राकृतिक संस्थान प्रयागराज रेकी सेंटर पर निःशुल्क स्पर्श ध्यान कार्यक्रम के पश्चात जाने माने स्पर्श चिकित्सक सतीश राय ने कही।
उन्होंने लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा कि ठंड सबसे अच्छा मौसम होता है। स्पर्श-ध्यान कर शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का सबसे अनुकूल समय यही है। इस मौसम में अपने ऊपर ठीक से ध्यान न देने पर पाचन की समस्याएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में सही खान-पान और स्पर्श ध्यान कर अपने शरीर को स्वस्थ रख सकते हैं।
सतीश राय ने कहा कि 40 वर्ष की उम्र के पश्चात सर्दियों में सेहत पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। शरीर में होने वाले उतार-चढ़ाव के कारण शरीर में अचानक कुछ बदलाव असहज हो सकते हैं। इस उम्र में नींद की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में अपनी दिनचर्या एवं खान-पान पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि ठंड अधिक होने से प्यास कम लगती है, पानी कम पीने से या बार-बार गर्म पानी पीने से बचना चाहिए। ज्यादा चाय काफी या अल्कोहल पीने से पाचन क्रिया बाधित होता है। उन्होंने कहा सर्दियों के मौसम में बुजुर्गों का उचित ध्यान देना चाहिए। उम्र बढ़ने के साथ-साथ उनके आंतरिक अंग भी कमजोर हो जाते हैं तो उन्हें सुपाच्य और संतुलित भोजन करना चाहिए। सर्दियों में पैदा होने वाले सभी तरह की हरी पत्तेदार सब्जियों और फलों का सेवन अत्यधिक करना चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र