भागदौड़ भरी जिंदगी में गौरैया दूर करती है मानसिक अवसाद : अनुपम मौर्य

 






देवरिया, 19 मार्च (हि.स.)। विश्व गौरैया दिवस की पूर्व संध्या पर स्थानीय ब्लूमिंग रोज अकादमी के प्रांगण में अर्चना फाउंडेशन द्वारा ड्राइंग एवं पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानाचार्य अंजली यादव ने मुख्य अतिथि अनुपम मौर्य (डीएफओ) का पुष्प गुच्छ देकर स्वागत कर किया।

मुख्य अतिथि अनुपम मौर्य ने कहा कि गौरैया केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि पर्यावरण की प्रहरी है। इसकी मौजूदगी मानसिक सुकून देती है और मनुष्य के साथ भावनात्मक सम्बंध भी बनाती है। उन्होंने बताया कि प्रदूषण, तेज ध्वनि और मोबाइल टावरों की तरंगों के कारण गौरैया हमसे दूर होती जा रही है। ऐसे में लोगों को चाहिए कि वे अपने घरों और छतों पर दाना-पानी रखें, ताकि गौरैया वापस लौट सके।

ट्रस्टी अध्यक्ष हिमांशु कुमार सिंह ने बताया कि प्रतियोगिता का विषय “सेव द स्पैरो, सेव द नेचर” रखा गया, जिसका उद्देश्य बच्चों में गौरैया संरक्षण और प्रकृति के प्रति जागरूकता विकसित करना है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए हिमांशु सिंह ने कहा कि गौरैया का घर-आंगन में आगमन खुशहाली का संकेत होता है, लेकिन आज उसकी चहचहाहट धीरे-धीरे गायब होती जा रही है। उन्होंने बताया कि अर्चना फाउंडेशन द्वारा हर वर्ष की तरह इस बार भी एक सप्ताह तक “गौरैया संरक्षण पखवारा” चलाया जाएगा। जिसके तहत विभिन्न स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम, पर्यावरण मित्र क्लब की स्थापना, चित्र प्रदर्शनी, घोंसला वितरण एवं पौधारोपण किया जाएगा।

प्रतियोगिता में मानवी सिंह, रिया पाल, अदिति चौरसिया, मानसी मधेसिया और अनुष्का सिंह को स्मृति चिन्ह एवं गौरैया घोंसला देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विजय पटेल, अश्वनी कन्नौजिया (वन दरोगा), सुभाष चंद यादव (वन दरोगा), अजय विश्वकर्मा, उज्जवल विश्वकर्मा, आलोक कुशवाहा, गीतांजलि सिंह एवं पूर्णिमा सिंह उपस्थित रहीं।

हिन्दुस्थान समाचार / ज्योति पाठक