अंतरिक्ष तकनीक से पर्यावरण और आपदा प्रबंधन की चुनौतियों का समाधान संभव : डॉ. सुधाकर शुक्ला
कानपुर, 23 अगस्त (हि.स.)। सुदूर संवेदन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का प्रभावी उपयोग पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, वायु एवं मृदा प्रदूषण की निगरानी के साथ आपदा प्रबंधन में भी किया जा सकता है। तकनीक के इन साधनों के माध्यम से पर्यावरण से जुड़ी कई जटिल समस्याओं का बेहतर समाधान संभव है। यह बातें रविवार को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस-2026 के अवसर पर छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में आयोजित विशेष विशेषज्ञ व्याख्यान में रिमोट सेंसिंग एप्लिकेशन सेंटर, लखनऊ के स्कूल ऑफ जियोइन्फॉर्मेटिक्स के प्रमुख डॉ. सुधाकर शुक्ला ने कहीं।
विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग, स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज और राष्ट्रीय सेवा योजना की विश्वेश्वरैया यूनिट-4 के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस-2026 के उपलक्ष्य में विशेष विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस वर्ष राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस की थीम “विकसित भारत की ओर-नवाचार, सहयोग और वैश्विक अंतरिक्ष नेतृत्व की आकांक्षा” रखी गई है।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. सुधाकर शुक्ला ने “आकाश से नज़र: विकसित भारत की दिशा में सतत विकास के लिए अंतरिक्ष की एक अग्रणी पहल” विषय पर विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने सुदूर संवेदन तकनीक के माध्यम से धरती और पर्यावरण की निगरानी की प्रक्रिया को समझाते हुए बताया कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरणीय समस्याओं की पहचान में काफी मदद मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग को सुदूर संवेदन तकनीक के साथ जोड़कर जल स्रोतों की निगरानी, वायु प्रदूषण का आकलन, मृदा प्रदूषण की पहचान और आपदाओं के प्रभाव का विश्लेषण अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकता है। इससे पर्यावरण प्रबंधन और आपदा प्रबंधन की योजनाओं को वैज्ञानिक आधार देने में भी मदद मिलेगी।
कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम के संरक्षक प्रो. राजेश कुमार द्विवेदी, सीडीसी एवं निदेशक, स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज तथा कुलसचिव राकेश कुमार मिश्रा रहे। आयोजन की अध्यक्षता स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज की उपनिदेशक डॉ. अंजू दीक्षित ने की।
कार्यक्रम की संयोजक डॉ. द्रौपती यादव, असिस्टेंट प्रोफेसर एवं एनएसएस प्रोग्राम ऑफिसर, विश्वेश्वरैया यूनिट-4, पर्यावरण विज्ञान विभाग रहीं। व्याख्यान में विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं, एनएसएस स्वयंसेवकों, शोधार्थियों और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप