फुहारा सिंचाई अपनाकर राम जीवन ने पेश की नजीर, 90 प्रतिशत सब्सिडी का उठाया लाभ : आर.पी. कुशवाहा
-बूंद-बूंद की समझी कीमत, स्प्रिंकलर से बदली किस्मत - बिजली-पानी की बचत कर पाली भोगीपुर का किसान बना 'लखपति', सालाना कमाई 5 लाख के पार- कम हॉर्सपावर की मोटर से 8.5 बीघा में कर रहे बंपर पैदावार
कानपुर, 14 अप्रैल (हि.स.)। प्रदेश सरकार का प्राथमिकता वाला क्षेत्र जल संरक्षण है। पाली भोगीपुर में राम जीवन ने जिस तरह 90 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ उठाकर स्प्रिंकलर और खेत-तालाब को जोड़ा है, वह जरूरी है। इससे न केवल किसान की लागत घटी है, बल्कि बिजली और पानी की भारी बचत हो रही है। हम चाहते हैं कि क्षेत्र के अन्य किसान भी बिजली-पानी बचाने वाले इस मॉडल को अपनाएं। यह बातें मंगलवार को भूमि संरक्षण अधिकारी आर.पी. कुशवाहा ने कही।
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा चलाई जा रही 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' (प्रति बूंद अधिक फसल) मुहिम अब गांवों में रंग लाने लगी है। सरसौल ब्लॉक के पाली भोगीपुर गांव के प्रगतिशील किसान राम जीवन ने इस योजना को अपनाकर न केवल अपनी तकदीर बदली है, बल्कि गिरते भूजल स्तर को बचाने के लिए एक बड़ा संदेश भी दिया है। स्प्रिंकलर (फुहारा सिंचाई) के जरिए उन्होंने पानी और बिजली की बर्बादी को न्यूनतम स्तर पर लाकर खेती को फायदे का सौदा बना दिया है।
स्प्रिंकलर से 50 प्रतिशत तक बचत
राम जीवन की सफलता का सबसे अहम पहलू पानी और बिजली की बचत है। जहाँ पारंपरिक सिंचाई (नाली द्वारा) में आधा पानी जमीन सोख लेती थी या वाष्पित हो जाता था, वहीं अब स्प्रिंकलर तकनीक से फसलों को 'बारिश की बूंदों' की तरह जरूरत के अनुसार पानी मिलता है।
रामजीवन को पहले जहाँ 8.5 बीघा खेत सींचने के लिए 10 एचपी की भारी मोटर घंटों चलानी पड़ती थी, अब वही काम मात्र 5 एचपी की मोटर से आधे समय में पूरा हो जाता है। इससे बिजली के बिल में भारी कटौती हुई है। फुहारा सिंचाई से पानी सीधे पौधों की जड़ों और पत्तियों तक पहुँचता है, जिससे पानी की बर्बादी रुकी है और कम पानी में ज्यादा रकबा सींचा जा रहा है।
90 प्रतिशत सरकारी अनुदान मिला
राम जीवन बताते हैं कि यह बदलाव योगी सरकार की भारी सब्सिडी के बिना संभव नहीं था। स्प्रिंकलर सिस्टम लगवाने के लिए उन्हें 90 प्रतिशत का सरकारी अनुदान मिला। लाखों की लागत वाला यह आधुनिक सिंचाई सिस्टम उन्हें मात्र 27,000 रुपये के अंशदान पर उपलब्ध हो गया। यह उन किसानों के लिए बड़ी प्रेरणा है जो संसाधनों के अभाव में आधुनिक तकनीक से कतराते हैं।
खेती का 'मल्टी-लेयर' मॉडल और मुनाफा
राम जीवन ने अपनी 8.5 बीघा जमीन पर फसलों का ऐसा चक्र तैयार किया है कि हर मौसम में आमदनी बनी रहती है। वो हर मौसम की खेती करते हैं।
सब्जियां व अनाज: तीन बीघा में शिमला मिर्च, दो बीघा में घुइयां, चार बीघा में मक्का और आलू-टमाटर की खेती।
मछली पालन: एक बीघा में 'खेत-तालाब' बनाकर वे मछली पालन कर रहे हैं।
जीरो बजट खाद: दो गायों के जरिए स्वयं केंचुआ खाद और जीवामृत तैयार करते हैं, जिससे रासायनिक खाद का खर्च शून्य हो गया है।
किसान रामजीवन ने बताया कि पहले बिजली का बिल और पानी की किल्लत बड़ी समस्या थी। स्प्रिंकलर लगने के बाद अब कम बिजली में पूरा खेत आसानी से सींच जाता है। सरकार की मदद से मेरी सालाना आय दो लाख से बढ़कर पांच लाख रुपये के पार पहुंच गई है। बचत की गई बिजली और पानी ही हमारी असली कमाई है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप