सीता नवमी पर जन-जन तक पहुंचेगा माता सीता का आदर्श : डॉ सीमा जादौन
कानपुर, 05 अप्रैल (हि.स.)। सीता नवमी के जरिए माता सीता के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। पूरे कानपुर प्रांत में बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित कर समाज में संस्कार और मूल्यों का संदेश दिया जाएगा। युवा पीढ़ी, खासकर बेटियों और महिलाओं के सामने उनके जीवन चरित्र को प्रभावी रूप से रखा जाएगा। नारी शक्ति, धैर्य और मर्यादा के स्वरूप को समाज में पुनर्स्थापित करने का प्रयास होगा। यह बातें रविवार को प्रांत संयोजिका डॉ. सीमा जादौन ने कही।
विश्व हिन्दू परिषद् कानपुर प्रांत के प्रांत कार्यालय, श्री दुर्गा भवन, गोविंदनगर में मातृशक्ति एवं दुर्गा वाहिनी की प्रांत टोली और विभाग बैठक आयोजित की गई। जिसमें सीता नवमी को व्यापक स्तर पर मनाने का निर्णय लिया गया। बैठक में पूरे कानपुर प्रांत में 500 कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई गई।
बैठक में डॉ. सीमा जादौन ने कहा कि माता सीता भारतीय संस्कृति में त्याग, तपस्या, धैर्य, शील, मर्यादा, करुणा, स्वाभिमान, सेवा और समर्पण की प्रतीक हैं। उनका जीवन समाज और परिवार के लिए एक आदर्श मार्ग प्रस्तुत करता है, जिसे वर्तमान समय में अपनाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को माता सीता के जीवन मूल्यों से जोड़ना जरूरी है। जिससे समाज में नैतिकता और संस्कारों को मजबूती मिल सके। बेटियों, माताओं और बहनों के सामने उनके चरित्र को प्रभावी रूप से प्रस्तुत करने के लिए विशेष कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है।
बैठक में यह भी बताया गया कि माता सीता ने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि नारी केवल संवेदनशीलता का प्रतीक नहीं, बल्कि शक्ति, संयम, सहनशीलता और आत्मगौरव की भी पहचान है। मिथिला की पुत्री और अयोध्या की मर्यादा के रूप में उनका जीवन भारतीय नारीत्व की गरिमा को दर्शाता है।
निर्णय लिया गया कि कानपुर में तपेश्वरी मंदिर से सीता माता के प्राकट्य दिवस कार्यक्रमों की शुरुआत की जाएगी। इन आयोजनों के माध्यम से परिवार, संस्कार, नारी सम्मान और कर्तव्यबोध का संदेश समाज तक पहुंचाया जाएगा।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि माता सीता का जीवन कुटुम्ब व्यवस्था, सामाजिक समरसता और मर्यादित आचरण का उदाहरण है। उनके जीवन के विभिन्न प्रसंग समाज को संवेदनशील और संस्कारित जीवन की दिशा दिखाते हैं।
पंच परिवर्तन के संदर्भ में भी माता सीता के जीवन पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि उनका जीवन परिवार सुदृढ़ीकरण, सामाजिक समरसता, प्रकृति के प्रति संवेदना और सेवा भावना का प्रेरक स्रोत है।
बैठक में प्रांत अध्यक्ष राजीव महाना, प्रांत सह संयोजिका वैशाली, विभाग मंत्री गौरांग, डॉ. तापसी चक्रवर्ती, अर्चिता, अर्चना, माया, विनीता, अंजू, प्रतिमा, शिखा और ज्योति सहित कई लोग मौजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप