सिंधी समाज का ऐतिहासिक संकल्प : घर-परिवार में केवल सिंधी भाषा में हाेगा संवाद

 


गोरखपुर, 09 जनवरी (हि.स.)। सिंधी भाषा, संस्कृति और अस्मिता के संरक्षण की दिशा में गोरखपुर के सिंधी समाज ने एक ऐतिहासिक और दूरगामी पहल करते हुए सशक्त संकल्प लिया है। इसी क्रम में युवा सिंधी समाज, गोरखपुर की एक महत्वपूर्ण एवं विचारोत्तेजक बैठक सिंधी धर्मशाला, जताशंकर में संपन्न हुई, जिसमें समाज के प्रबुद्धजनों ने एक स्वर में यह निर्णय लिया कि अब घर-परिवार में, विशेषकर बच्चों के साथ, संवाद केवल सिंधी भाषा में ही किया जाएगा।

बैठक में वर्तमान सामाजिक-शैक्षिक परिदृश्य पर गंभीर मंथन किया गया। वक्ताओं ने चिंता व्यक्त की कि अंग्रेज़ी माध्यम की शिक्षा और आधुनिक जीवनशैली के प्रभाव में सिंधी परिवारों में अपनी मातृभाषा का प्रयोग लगातार कम होता जा रहा है। परिणामस्वरूप नई पीढ़ी न केवल भाषा से, बल्कि अपनी जड़ों—संस्कृति, परंपराओं और सिंधियत—से भी धीरे-धीरे दूर होती जा रही है।

इस अवसर पर समाज के महामंत्री देवा केशवानी ने भावपूर्ण शब्दों में कहा कि “भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी पहचान, इतिहास और संस्कारों की संवाहक होती है। यदि घर के भीतर ही सिंधी भाषा का प्रयोग बंद हो गया, तो आने वाली पीढ़ियाँ अपनी सांस्कृतिक विरासत से अनभिज्ञ रह जाएंगी। भाषा के संरक्षण की सबसे पहली पाठशाला घर होता है।”

उन्होंने समाज के प्रत्येक परिवार से आह्वान किया कि वे इस संकल्प को औपचारिक नहीं, बल्कि अपने दैनिक जीवन का स्वाभाविक हिस्सा बनाएं।

विचार-विमर्श के उपरांत बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से यह संकल्प लिया कि वे अपने घरों में बच्चों से, आपसी पारिवारिक संवाद में तथा सामाजिक मेल-मिलाप के अवसरों पर सिंधी भाषा को प्राथमिकता देंगे। साथ ही यह भी तय किया गया कि समाज के आयोजनों, बैठकों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सिंधी भाषा के प्रयोग को और अधिक प्रोत्साहित किया जाएगा।

बैठक में संस्था के अध्यक्ष कमल मंझानी सहित हरीश करमचंदानी, नरेश करमचंदानी, विक्की कुकरेजा, वासु पाहुजा, ईशु लाखमानी, सूरज हिरवानी, मनोज सचदेवा, विजय नेभानी, मुकुल करवानी, अनिल मिर्गवानी सहित समाज के अनेक गणमान्य एवं सक्रिय सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल को आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सांस्कृतिक विरासत बचाने की दिशा में मील का पत्थर बताया।

बैठक का समापन सिंधी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को सहेजने के दृढ़ सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। समाज के वरिष्ठजनों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह निर्णय केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गोरखपुर के सिंधी परिवारों में एक नई भाषाई चेतना का सूत्रपात करेगा, जो आने वाले वर्षों में पूरे समाज के लिए प्रेरणा बनेगा।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय