खामोशी टूटी, कॉक्लियर इम्प्लांट से मूक बधिर बच्चों की लौटी आवाज : जिलाधिकारी

 




कानपुर, 04 मई (हि.स.)। कॉक्लियर इम्प्लांट जैसी योजनाएं मूक बधिर बच्चों के जीवन में नया उजाला ला रही हैं, अब ये बच्चे सुन और बोल पा रहे हैं, जिससे उनका भविष्य बेहतर बन रहा है और परिवारों को नई खुशी मिली है। यह बातें सोमवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहीं।

आज कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित संवाद कार्यक्रम में मूक बधिर बच्चों के जीवन में आए बदलाव की भावुक तस्वीर सामने आई। अलसमद, आराध्या मिश्रा, ईमान खान, नायमा सिद्दीकी और मोहम्मद उवैस जैसे बच्चों के अभिभावकों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि जो बच्चे पहले सुन और बोल नहीं पाते थे, अब वे अपने माता-पिता को ‘मम्मी-पापा’ कहकर पुकार रहे हैं।

मोहम्मद उवैस की माता अलसिफा ने बताया कि पहले उनका बेटा कोई प्रतिक्रिया नहीं देता था, लेकिन ऑपरेशन के बाद जब उसने पहली बार ‘मम्मी-पापा’ कहा तो वह पल उनके जीवन का सबसे बड़ा सुख बन गया। नायमा सिद्दीकी की माता सीमा सिद्दीकी ने भी बताया कि सर्जरी के बाद उनकी बेटी में लगातार सुधार हुआ और अब वह सामान्य रूप से संवाद करने लगी है।

विशेषज्ञों के अनुसार कॉक्लियर इम्प्लांट मूक बधिर बच्चों के लिए बेहद प्रभावी सर्जरी है। इससे बच्चे पहले ध्वनियां सुनने लगते हैं और फिर नियमित स्पीच थेरेपी के जरिए बोलना सीखते हैं। कम उम्र, खासकर एक से पांच वर्ष के बीच, इसका परिणाम अधिक बेहतर माना जाता है।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि आरबीएसके और आईसीडीएस के माध्यम से कम उम्र के बच्चों की समय से पहचान कर उन्हें योजना का लाभ दिलाया जाए। मुख्य विकास अधिकारी दीक्षा जैन ने ब्लॉक स्तर पर विशेष कैंपों में पात्र बच्चों के चयन पर जोर दिया।

दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की शल्य चिकित्सा योजना के तहत वर्ष 2025-26 में बच्चों को कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी का लाभ मिला, जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को प्रति बच्चे छह लाख रुपये तक का अनुदान दिया गया। ऑपरेशन के बाद अस्पतालों में नियमित स्पीच थेरेपी से बच्चों में लगातार सुधार हो रहा है और वे सामान्य जीवन की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप