श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद प्रकरण पर बाेले महेंद्र प्रताप- जमीन हमारी है, एक इंच भी नहीं देंगे भूमि
तीसरी बार हुई समझौता वार्ता में मुस्लिम पक्ष नहीं हुआ उपस्थित, हिंदू पक्षकारों ने दर्ज कराई आपत्ति
मथुरा, 18 अगस्त (हि.स.)। श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मंगलवार को विशेष लोक अदालत में समझौता वार्ता का तीसरा प्रयास हुआ। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार यादव (द्वितीय) की लोक अदालत में हुई सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष उपस्थित नहीं हुआ, जबकि हिंदू पक्षकार मौजूद रहे। मुस्लिम पक्ष की अनुपस्थिति के चलते समझौता वार्ता की पत्रावली को निस्तारित कर दिया गया। अगली समझौता वार्ता 21, 22 अथवा 23 अगस्त में से किसी एक तिथि को सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तावित है।
समझौता वार्ता के बाद हिंदू पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने कहा कि मुस्लिम पक्ष का बार-बार वार्ता में उपस्थित न होना इस प्रकरण को लंबित रखने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि की विवादित भूमि भगवान श्रीकृष्ण की भूमि है और उसके बदले किसी अन्य स्थान पर जमीन देने का सवाल ही नहीं उठता।
महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने कहा, हमारा स्पष्ट मत है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि की करीब ढाई एकड़ विवादित भूमि भगवान श्रीकृष्ण की है। अपने गोविंद की भूमि और उसके बदले किसी अन्य स्थान पर भूमि देने वाले हम कौन होते हैं। जमीन हमारी है, इसलिए एक इंच भूमि भी नहीं देंगे।
उन्होंने कहा, हम न्यायालय के समक्ष इस बात को पूरी मजबूती से रखेंगे कि जिस भूमि को हम श्रीकृष्ण जन्मभूमि मानते हैं, उसके बदले किसी दूसरे स्थान पर भूमि स्वीकार करना हमारे अधिकार और आस्था दोनों के अनुरूप नहीं है।
महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा, हमारा आरोप है कि विदेशी आक्रांताओं ने भारत में मंदिरों को तोड़कर धार्मिक स्थलों पर अतिक्रमण किया। मथुरा का यह प्रकरण भी उसी ऐतिहासिक विवाद से जुड़ा हुआ है। हमारे अनुसार वर्ष 1670 में औरंगजेब के समय श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मंदिर को क्षति पहुंचाई गई और उसके स्थान पर ईदगाह का निर्माण कराया गया। इसी अतिक्रमण को हटाने की मांग को लेकर हम छह वर्ष से अधिक समय से न्यायालय में संघर्ष कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, यदि अतिक्रमित भूमि के बदले अतिक्रमण करने वालों को दूसरी भूमि देने का सिद्धांत स्वीकार किया गया तो देशभर में मंदिरों से जुड़े ऐसे विवादों में हिंदुओं को ही जमीन देने वाला पक्ष बनना पड़ेगा। अतिक्रमण हटाने के लिए अतिक्रमित भूमि के बदले दूसरी भूमि देना समाधान नहीं हो सकता।
महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि पूर्व की समझौता वार्ताओं में कुछ हिंदू पक्षकारों और अन्य लोगों की ओर से शाही ईदगाह मस्जिद को हटाकर अन्य स्थान पर भूमि उपलब्ध कराने का प्रस्ताव सामने आया था।
उन्होंने कहा, श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मूल गर्भगृह के ऊपर वर्तमान में जो निर्माण है, वह हमारे लिए केवल भवन का विवाद नहीं बल्कि भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि से जुड़ा विषय है। हमारा प्रयास न्यायालय के माध्यम से इस विवाद का न्यायपूर्ण समाधान कराने का है।
उन्होंने मुस्लिम पक्ष के वार्ता में उपस्थित नहीं होने पर कहा, पहली लोक अदालत में मुस्लिम पक्ष उपस्थित नहीं हुआ था। दूसरी बार में वार्ता में दोनों पक्ष उपस्थित हुए, लेकिन आपसी बातचीत से कोई सहमति नहीं बन सकी। मंगलवार को हुई तीसरी वार्ता में भी मुस्लिम पक्ष उपस्थित नहीं हुआ। इससे यह प्रतीत होता है कि मामले को लंबित रखने की कोशिश की जा रही है। हम चाहते हैं कि मामले का शीघ्र न्यायिक निस्तारण हो।
महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा, हम समझौते के विरोधी नहीं हैं, लेकिन समझौता न्याय और अधिकार के आधार पर होना चाहिए। श्रीकृष्ण जन्मभूमि की भूमि को किसी अन्य स्थान की भूमि से बदलने का प्रश्न ही नहीं है। हमारा पक्ष स्पष्ट है और हम इसे न्यायालय में पूरी मजबूती के साथ रखेंगे।
इस दौरान हिंदू पक्षकार अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह, दिनेश फलाहारी, महेश खंडेलवाल, कपिल शर्मा, विजय बहादुर सिंह, हरेराम त्रिपाठी, प्रदीप श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / महेश कुमार