अब एसजीपीजीआई में हो सकेगा चेहरे की जटिल चोट व विकृतियों का अत्याधुनिक उपचार

 




लखनऊ, 02 अगस्त (हि.स.)। अब उत्तर प्रदेश के रोगियों को चेहरे पर लगी जटिल चोटों एवं पोस्ट-ट्रॉमेटिक विकृतियों के उपचार के लिए प्रदेश के बाहर नहीं जाना पड़ेगा। लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग में चेहरे पर लगी चोट का अत्याधुनिक उपचार हो सकेगा। एसजीपीजीआई ने क्रैनियो-मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग ने पेशेंट-स्पेसिफिक इम्प्लांट तथा ओ-आर्म इमेजिंग तकनीक की सहायता से इंट्राऑपरेटिव नेविगेशन गाइडेड सेकेंडरी ऑर्बिटल वॉल रिकंस्ट्रक्शन की राज्य की पहली सफल सर्जरी सम्पन्न की है।

रोगी को पूर्व में हुए गंभीर चेहरे की चोट के कारण नेत्रगुहा की हड्डी की जटिल विकृति हो गई थी, जिसके कारण उसे लगातार प्रत्येक आकृति दो दिखाई पड़ती थी। इस जटिल सर्जरी में इंट्राऑपरेटिव नेविगेशन तकनीक ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऑपरेशन पूर्ण होने से पूर्व ओ-आर्म इमेजिंग की गई। इससे ऑपरेशन थिएटर में ही इम्प्लांट की स्थिति एवं ऑर्बिटल रिकंस्ट्रक्शन का तत्काल मूल्यांकन संभव हुआ। इस प्रक्रिया से सर्जरी की गुणवत्ता की वस्तुनिष्ठ पुष्टि हुई, इम्प्लांट की सटीक स्थिति सुनिश्चित हुई तथा भविष्य में किसी शेष विकृति अथवा पुनः सुधारात्मक सर्जरी की आवश्यकता की संभावना कम हो गई।

यह उत्तर प्रदेश का पहला मामला है, जिसमें सेकेंडरी ऑर्बिटल वॉल रिकंस्ट्रक्शन हेतु इंट्राऑपरेटिव नेविगेशन, ओ-आर्म इमेजिंग तथा पेशेंट-स्पेसिफिक इम्प्लांट का सफलतापूर्वक संयुक्त उपयोग किया गया है।

डॉ. कुलदीप विश्वकर्मा ने बताया कि अब चेहरे की गंभीर चोटों के बाद उत्पन्न विकृतियों, लगातार दोहरा दिखाई देने अथवा अन्य जटिलताओं से पीड़ित रोगी एपेक्स ट्रॉमा सेंटर, एसजीपीजीआई के ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग में उन्नत पुनर्निर्माण उपचार की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं।

एसजीपीजीआई के निदेशक पद्मश्री प्रो. आर. के. धीमान ने कहा, यह ऐतिहासिक उपलब्धि संस्थान की नवाचार, सटीकता और उत्कृष्ट रोगी देखभाल के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है। अब उत्तर प्रदेश के रोगियों को जटिल चेहरे की चोटों एवं पोस्ट-ट्रॉमेटिक विकृतियों के लिए अत्याधुनिक पुनर्निर्माण उपचार अपने ही राज्य में प्राप्त हो सकेगा।

हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन