वास्तविक स्थिति और अपेक्षाओं में असंतुलन से हाेता है तनाव : डॉ. अमरेश श्रीवास्तव
गोरखपुर, 23 फ़रवरी (हि.स.)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में अधिष्ठाता छात्र कल्याण एवं मनोविज्ञान विभाग के संयुक्त तत्त्वावधान में फ्रीडम फ्रॉम पॉवर्टी ट्रस्ट (इंडिया) एवं मानसिक शक्ति फाउंडेशन के सहयोग से “मेन्टल हेल्थ चैलेंजेज एन्ड साइकोलॉजिकल वेल बीइंग इन हायर एजुकेशनल इंस्टिट्यूशन्स ” विषय पर एक दिवसीय सिम्पोजियम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने किया। कार्यक्रम में बतौर विषय विशेषज्ञ मानसिक शक्ति फाउंडेशन के निदेशक एवं वेस्टर्न यूनिवर्सिटी (कनाडा) में प्रोफेसर एमेरिटस डॉ. अमरेश श्रीवास्तव, बी.आर.डी. मेडिकल कॉलेज गोरखपुर के मनोरोग विभाग के प्रोफेसर एवं अध्यक्ष डॉ. तापस के. आइच, मेडिकल कॉलेज अयोध्या में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कुँवर वैभव एवं फ्रीडम फ्रॉम पॉवर्टी ट्रस्ट के उपाध्यक्ष हेमंत कुमार दीक्षित की उपस्थिति रही। इस दौरान व्याख्यान के साथ ही इंटरैक्शन सेशन भी किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने अपनी शंकाओं का निवारण किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने अपने उद्बोधन में कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के बिना जीवन और शिक्षा की यात्रा सुचारु रूप से आगे नहीं बढ़ सकती। मेन्टल हेल्थ ठीक करने की दिशा में विश्वविद्यालय प्रतिबद्ध है। आज के प्रतिस्पर्धी वातावरण में विद्यार्थियों के लिए मानसिक संतुलन और भावनात्मक सुदृढ़ता अत्यंत आवश्यक है। मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे सतत प्रयास न केवल विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सहायक सिद्ध होंगे, बल्कि एक स्वस्थ, संवेदनशील और सशक्त शैक्षणिक वातावरण के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
बतौर रिसोर्स पर्सन उपस्थित मानसिक शक्ति फाउंडेशन के निदेशक एवं वेस्टर्न यूनिवर्सिटी (कनाडा) में प्रोफेसर एमेरिटस डॉ. अमरेश श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि “जैसे हैं, वैसे ही स्वयं को स्वीकार करना मानसिक स्वास्थ्य की दिशा में पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है। व्यक्ति की वास्तविक स्थिति और अपेक्षाओं में असंतुलन तनाव को जन्म देता है। वर्तमान समय में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना और इससे जुड़ना केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक एवं नैतिक जिम्मेदारी है. उन्होंने विशेष रूप से 14 से 17 वर्ष की आयु के किशोरों में मानसिक स्वास्थ्य की रोकथाम (Prevention) पर बल देते हुए कहा कि यह आयु वर्ग संवेदनशील होता है, अतः समय रहते जागरूकता और परामर्श अत्यंत आवश्यक है।
बी.आर.डी. मेडिकल कॉलेज गोरखपुर के मनोरोग विभाग के प्रोफेसर एवं अध्यक्ष डॉ. तापस के. आइच ने अपने संबोधन में कहा, मानसिक बीमारी जीवन नहीं लेती, बल्कि व्यक्ति को अक्षम बना देती है। यह जीवन के सार को छीन लेती है। यदि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान की जाए, संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाया जाए तथा उचित उपचार उपलब्ध कराया जाए, तो प्रभावित व्यक्ति पुनः सामान्य एवं संतुलित जीवन की ओर लौट सकता है।
मेडिकल कॉलेज अयोध्या में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कुँवर वैभव ने कहा कि एआई मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण परिवर्तन ला सकता है। यह सेवाओं की सुलभता बढ़ाने, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े स्टिगमा को कम करने तथा जरूरतमंद व्यक्तियों को निरंतर सहयोग प्रदान करने में प्रभावी भूमिका निभा सकता है। AI तकनीक न केवल तकनीकी नवाचार का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता और मानवीय सहयोग का भी एक सशक्त माध्यम बनकर उभर रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय