यूपी के 1.88 लाख स्कूलों का स्व-मूल्यांकन पूरा,तेज हुई विद्यालय रेटिंग की प्रक्रिया
लखनऊ, 16 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह के निर्देशन में राज्य के विद्यालयों को स्वच्छ, हरित और पर्यावरण-अनुकूल शिक्षण परिवेश के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग (एसएचवीआर) 2026-27 के अंतर्गत प्रदेश के 1,88,301 विद्यालयों ने स्व-मूल्यांकन सर्वेक्षण पूरा कर पोर्टल पर जमा किया है। इनमें 1,74,754 विद्यालयों ने तीन स्टार या उससे अधिक की रेटिंग प्राप्त की है। अब दूसरे चरण में विद्यालयों की व्यवस्थाओं का भौतिक सत्यापन किया जाएगा, जिसे 31 अक्टूबर तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
विद्यालयों में स्वच्छता, स्वास्थ्यकर वातावरण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संचालित एसएचवीआर के अंतर्गत मूल्यांकन की प्रक्रिया दो चरणों में निर्धारित है। पहले चरण में विद्यालयों ने निर्धारित प्रश्नावली के आधार पर अपनी व्यवस्थाओं का स्व-मूल्यांकन किया। अब दूसरे चरण में इस विवरण का जमीनी स्तर पर सत्यापन किया जाएगा, जिससे पोर्टल पर दर्ज सूचनाओं और विद्यालयों की वास्तविक स्थिति का मिलान हो सके।
विदित हो कि प्रदेश के 1,88,301 विद्यालयों का स्व-मूल्यांकन पूरा होना इस अभियान का महत्वपूर्ण पड़ाव है। अब 31 अक्टूबर तक सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद विद्यालयों में स्वच्छता और हरित परिवेश से संबंधित व्यवस्थाओं का अधिक विश्वसनीय आकलन सामने आएगा। राज्य सरकार की विद्यालयी परिवेश को बेहतर बनाने की प्राथमिकताओं के अनुरूप यह पहल स्वच्छता, पर्यावरणीय चेतना और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण वातावरण को प्रोत्साहित करने में सहायक होगी।
जिलास्तरीय समितियों की निगरानी में होगा सत्यापन
दूसरे चरण की प्रक्रिया को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए गए। निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार जिलास्तर पर मूल्यांकन समितियों के माध्यम से सत्यापन कार्य की निगरानी की जाएगी। समिति की अध्यक्षता जिलाधिकारी अथवा उनके नामित अधिकारी द्वारा की जाएगी।
महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि “स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग के माध्यम से प्रदेश के विद्यालयों में स्वच्छता, स्वास्थ्यकर वातावरण और पर्यावरणीय चेतना को प्रोत्साहित किया जा रहा है। दूसरे चरण में भौतिक सत्यापन से विद्यालयों की वास्तविक स्थिति का आकलन होगा और मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन