अलीगढ़ का शेखा पक्षी विहार प्रदेश के 12वें रामसर स्थल के रूप में अधिसूचित
लखनऊ, 22 अप्रैल (हि.स.)। जनपद अलीगढ़ स्थित शेखा पक्षी विहार को प्रदेश के 12वें रामसर स्थल के रूप में अधिसूचित किया गया है। उत्तर प्रदेश के वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डा0 अरूण कुमार सक्सेना ने इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हृदय से आभार प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि नये रामसर स्थलों की अधिसूचना से इन क्षेत्रों में पर्यटन में बढ़ोत्तरी होने की संभावना है, जिससे स्थानीय लोगों के लिये रोजगार के अवसर सृजित होंगे एवं स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण द्वारा शासन से प्राप्त अनुमोदन के आधार पर प्रदेश की महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों की रामसर सीट तैयार कर उन्हें अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों के रूप में चिन्हित कराने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। इसी कड़ी में रामसर सचिवालय द्वारा जनपद अलीगढ़ स्थित शेखा पक्षी विहार को प्रदेश के 12वें रामसर स्थल के रूप में अधिसूचित किया गया।
देश में इसे मिलाकर कुल 99 रामसर स्थल घोषित किया जा चुका है। 12 स्थलों के साथ उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर है। ज्ञातव्य है कि माह फरवरी, 2026 में भी एटा जनपद स्थित पटना पक्षी विहार को रामसर स्थल घोषित किया गया था। इस प्रकार विगत 02 माह में राज्य में 02 रामसर स्थलों की अधिसूचना की गई।
नामित आर्द्रभूमियों में जनपद हापुड, बुलंदशहर, संभल और अमरोहा स्थित अपर गंगा रिवर; जनपद उन्नाव स्थित नवाबगंज पक्षी विहार; जनपद इटावा स्थित सरसई नावर झील; जनपद रायबरेली स्थित समसपुर पक्षी विहार जनपद हरदोई स्थित सांडी पक्षी विहार; जनपद मैनपुरी स्थित समान पक्षी विहारः जनपद गोण्डा स्थित पार्वती अरगा पक्षी विहार; जनपद आगरा स्थित सूर सरोवर पक्षी विहार; जनपद मुजफ्फरनगर स्थित हैदरपुर आर्द्रभूमिः जनपद संत कबीर नगर स्थित बखीरा पक्षी विहार; जनपद एटा स्थित पटना पक्षी विहार तथा अलीगढ़ स्थित शेखा झील पक्षी विहार शामिल हैं। प्रदेश के इन सभी रामसर स्थलों का कुल क्षेत्रफल 39914.27 हे. है, जो कि प्रदेश के कुल आर्द्रभूमि क्षेत्रफल 12,42,530 हे. (नेशनल वेटलैंड एटलस के अनुसार) का लगभग 3.21 प्रतिशत भाग है।
मंत्री डा. अरूण सक्सेना ने बताया कि प्रदेश में आर्द्रभूमियों के संरक्षण की यह पहल न केवल जैव विविधता के संरक्षण को सुदृढ़ करेगी, बल्कि प्रवासी पक्षियों के संरक्षण, जल सुरक्षा, पारिस्थितिक संतुलन तथा स्थानीय समुदायों की आजीविका को भी सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। राज्य सरकार द्वारा आर्द्रभूमियों के संरक्षण एवं प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन