मंदिरों के फूलों के वैज्ञानिक प्रबंधन का दायरा और बढ़ाया जाएगा : अर्पित उपाध्याय

 


कानपुर, 03 अगस्त (हि.स.)। मंदिरों से निकलने वाले फूलों के कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन की पहल सफल रही है। अब इस व्यवस्था का दायरा बढ़ाते हुए अधिक मंदिरों को इससे जोड़ा जाएगा। यह बातें सोमवार को नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने फ्लावर साइक्लिंग कंपनी फूल के साथ पांच वर्ष के लिए अनुबंध विस्तार के अवसर पर कहीं।

नगर निगम ने मंदिरों से निकलने वाले निर्माल्य और फूलों के पर्यावरण अनुकूल निस्तारण की अपनी पहल को आगे बढ़ाते हुए फ्लावर साइक्लिंग कंपनी फूल के साथ नवंबर वर्ष 2031 तक के लिए अनुबंध का विस्तार कर दिया है।

सोमवार को नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय और कंपनी के संस्थापक एवं निदेशक अंकित अग्रवाल ने इस संबंध में समझौते पर हस्ताक्षर किए।

नगर निगम के अनुसार, वर्ष 2021 में शुरू हुई इस व्यवस्था के तहत वर्तमान में शहर के नौ प्रमुख मंदिरों से प्रतिदिन एकत्र होने वाले फूलों और अन्य पूजन सामग्री को रीसाइक्लिंग केंद्र भेजा जाता है। वहां इनका प्रसंस्करण कर पर्यावरण हितैषी उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इस पहल से अब तक हजारों मीट्रिक टन फूलों के कचरे को गंगा नदी और लैंडफिल में जाने से रोका गया है।

नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने कहा कि यह मॉडल ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का सफल उदाहरण है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण के साथ आजीविका सृजन भी सुनिश्चित हुआ है। उन्होंने बताया कि नगर निगम भविष्य में और अधिक मंदिरों को इस व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में काम करेगा।

कंपनी के संस्थापक एवं निदेशक अंकित अग्रवाल ने कहा कि कानपुर से शुरू हुई यह पहल आज एक प्रभावी कार्य प्रणाली बन चुकी है। अनुबंध के विस्तार से संग्रह व्यवस्था, प्रसंस्करण क्षमता और रोजगार सृजन को और मजबूती मिलेगी।

मंदिरों से एकत्र किए जाने वाले फूलों से चारकोल मुक्त धूपबत्ती, प्राकृतिक गुलाल, वर्मीकम्पोस्ट, प्राकृतिक रंग, साबुन तथा फूलों के रेशों से विकसित पशु-मुक्त चमड़े का विकल्प जैसे उत्पाद तैयार किए जाते हैं। कंपनी वर्तमान में कानपुर सहित वाराणसी, मथुरा और तिरुपति जैसे धार्मिक शहरों में भी इस मॉडल पर कार्य कर रही है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप