सावन के पहले सोमवार पर कैसे करें भगवान शिव की अराधना, जानें शुभ मुहूर्त
सावन के पहले सोमवार पर शिवलिंग का जलाभिषेक कर बेलपत्र, भांग-धतूरा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करने से पूरे हाेते हैं अधूरे कार्य
लखनऊ, 02 अगस्त (हि.स.)। सावन माह का पहला सोमवार 03 अगस्त को है। यह दिन भगवान शिव को समर्पित सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि, सावन के पहले सोमवार पर शिवलिंग का जलाभिषेक कर बेलपत्र, भांग-धतूरा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करने से अधूरे कार्य पूरे होते हैं तथा मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। साथ ही वैवाहिक और प्रेम जीवन में सुख-समृद्धि आने की भी मान्यता है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है और श्रद्धा-भाव से व्रत एवं पूजा करने पर भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। ऐसे में आइए जानते हैं सावन के पहले सोमवार का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।
आचार्य स्वामीनाथन शास्त्री के अनुसार, श्रावण के पहले सोमवार पर तीन अगस्त के दिन उत्तराभाद्रपद नक्षत्र, सुकर्मा योग का अद्भुत संयोग है। सुकर्मा योग शुभ और मंगलकारी होता है। इसमें भगवान शिव की स्तुति करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।
सावन के पहले सोमवार के शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:19 बजे से 05:01 बजे तक
इस समय भगवान शिव की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है।
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:54 बजे तक
शिव आराधना और अभिषेक के लिए सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त होता है।
प्रदोष काल: शाम 06:26 बजे से 07:56 बजे तक
भगवान शिव की विशेष पूजा के लिए प्रदोष काल अत्यंत शुभ माना जाता है।
निशिता काल: रात्रि 11:33 बजे से 12:21 बजे तक
महाकाल की कृपा और मनोकामाएं पूरी करने के लिए यह समय शुभ माना जाता है।
रात में करें ये तैयारी -
आचार्यों के अनुसार, रविवार की रात सोने से पहले घर को, खासकर जिस जगह पूजा करनी है, अच्छे से साफ कर लें। सुबह की पूजा के लिए जरूरी सामान पहले से तैयार रखें। पूजा की सामग्री में फूल, बेलपत्र, दूध, दही, शहद, घी, शक्कर, फल, अगरबत्ती, दीपक, कपूर और भगवान शिव की तस्वीर या शिवलिंग शामिल हैं।
व्रती इन बातों का करें पालन
पंडित भरत राम रतूड़ी के अनुसार श्रावण के सोमवार के दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालु ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। फिर शिवालय में जाकर शिवलिंग का गंगाजल और शुद्ध जल से अभिषेक करें। कच्चा दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करना चाहिए। अभिषेक के बाद पुनः स्वच्छ जल अर्पित करके शिवलिंग पर बेलपत्र अवश्य चढ़ाएं। बेलपत्र तीन पत्तियों वाला, साफ और बिना टूटा होना चाहिए। इसके अलावा धतूरा, आक का फूल, भांग, सफेद चंदन, सफेद पुष्प, अक्षत, जनेऊ, मौसमी फल और मिष्ठान अर्पित कर सकते हैं। पूजा के दौरान मन में ऊं नमः शिवाय का जाप करते रहें। शिव चालीसा अथवा रुद्राष्टक का पाठ विशेष फलदायी होता है।
शिवलिंग पर यह न चढ़ाएं
पंडित अवधेश मिश्र शास्त्री के अनुसार, पूजा शुरू करने से पहले भगवान शिव के शिवलिंग या प्रतिमा के सामने शांत मन से बैठें और संकल्प लें। संकल्प का अर्थ है पूरी भक्ति और श्रद्धा से व्रत निभाने का पवित्र वचन देना। मन से अपनी इच्छाएं और प्रार्थनाएं भगवान शिव के चरणों में अर्पित करें। शिवलिंग पर हल्दी, सिंदूर, केतकी का फूल, तुलसी दल और नारियल का पानी अर्पित नहीं करना चाहिए। भोलेबाबा के शिवलिंग पर दूध-जल, बेलपत्र, भांग, धतुरा अर्पित करके मनोकामना पूर्ति की याचना करनी चाहिए। शिव पूजा में इनका उपयोग नहीं किया जाता। श्रावण के सोमवार पर शिव पूजा से ग्रह दोषों की शांति, मानसिक तनाव में कमी और परिवार में सुख-शांति का वास होता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / Dr. Ashish Vashisht