सावन का पहला सोमवार कल, शिव मंदिरों में तैयारियां पूरी, सुकर्मा योग का अद्भुत संयोग
सावन के पहले सोमवार पर काफी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान शिव की करेंगे पूजा-अर्चना
लखनऊ, 02 अगस्त (हि.स.)। सावन मास का पहला सोमवार 03 अगस्त काे है। इसे लेकर काशी, प्रयागराज, अयोध्या, लखनऊ और एनसीआर समेत उत्तर प्रदेश के भगवान भोलेनाथ के मंदिरों में विशेष तैयारियां की गई हैं। सावन के पहले सोमवार पर काफी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करेंगे। मंदिरों में साफ-सफाई और सजावट का काम पूरा कर लिया गया है। मंदिर परिसरों को फूलों और झालरों से सजाया गया है। प्रमुख मंदिरों में बैरियर और कतार व्यवस्था भी की गई है ताकि श्रद्धालुओं को दर्शन में दिक्कत न हो।
काशी विश्वनाथ मंदिर में भव्य तैयारियां
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में सावन मास और कांवड़ की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विश्वभूषण मिश्र ने बताया कि, सावन के पहले और प्रत्येक सोमवार को श्रद्धालुओं पर फूल वर्षा की जाती है। उन्होंने बताया कि, श्रद्धालुओं के स्वागत और सुरक्षा के साथ-साथ उनके दर्शन को सुगम और सुविधाजनक बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। हमारे स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के अनुसार, श्रद्धालुओं के लिए जिग-जैग कतार व्यवस्था, छायादार जगह, ग्लूकोज-पानी की सुविधा और बारिश से बचाव जैसे इंतजाम किए गए हैं। विगत वर्षों में यहां एक करोड़ 65-70 लाख श्रद्धालु काशी विश्वनाथ में दर्शन-पूजन करने पहुंचते हैं। इस बार 80 लाख से 1 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है।
अयोध्या में तैयारियां पूरी
सावन के पहले सोमवार को लेकर रामनगरी अयोध्या के प्रमुख मठ-मंदिरों की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। सावन के पहले सोमवार पर तीन लाख से अधिक शिवभक्तों के अयोध्या पहुंचने की संभावना है। सावन के पहले सोमवार पर भीड़ का सर्वाधिक दवाब नागेश्वरनाथ व क्षीरेश्वरनाथ मंदिर पर होगा। नागेश्वरनाथ मंदिर से लेकर राम की पैड़ी परिसर तक बैरीकेडिंग कर दी गई है। शिवभक्तों को टुकड़ियों में दर्शन कराया जाता है। नागेश्वरनाथ मंदिर से लेकर राम की पैड़ी परिसर तक सात स्थानों पर बैरियर लगाए गए हैं। इन बैरियरों पर शिवभक्तों को रोककर जत्थों में आगे भेजा जाएगा। सुरक्षा के लिए अर्धसैनिक बलों की तैनाती होगी। इसके अलावा निगरानी के लिए मजिस्ट्रेटों को लगाया गया है।
प्रयागराज में सावन के पहले सोमवार की तैयारियां पूरी
तीर्थराज प्रयागराज में श्री मनकामेश्वर महादेव, ऋणमुक्तेश्वर महादेव, दशाश्वमेध महादेव, शिवकोटि, सोमेश्वरनाथ, तक्षकतीर्थ बड़ा शिवालय, पंचमुखी महादेव, पांडेश्वरनाथ महादेव, लोकनाथ महादेव सहित हर शिवालय में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक करने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ जुटेगी। दिनभर जलाभिषेक के बाद शाम को शिवलिंग का शृंगार किया जाएगा।
रोशनी में नहाये लखनऊ के शिवालय
राजधानी लखनऊ के प्रमुख शिव मंदिरों की रौनक देखते ही बनती हैं। लखनऊ के मनकामेश्वर मंदिर, बुद्धेश्वर महादेव मंदिर, कोनेश्वर महादेव, चंद्रिका देवी परिसर स्थित शिव मंदिर, खाटू श्याम परिसर के शिवालय और विभिन्न मोहल्लों के प्राचीन शिव मंदिरों में पहले सोमवार की तैयारियां जोरों पर हैं।
लोधेश्वर महादेव मंदिर में भक्तों की लंबी कतारें
बाराबंकी में प्रसिद्ध लोधेश्वर महादेव मंदिर में सावन के पहले सोमवार का उत्साह चरम पर है। रविवार को ही भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। सावन के पहले सोमवार को लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। मेला क्षेत्र को विभिन्न सेक्टरों और जोन में विभाजित किया गया है। सुरक्षा और व्यवस्थाओं के लिए पुलिस, पीएसी, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन, सफाईकर्मी और आपदा राहत टीमों की तैनाती की गई है।
प्रदेश के तिलभांडेश्वर महादेव वाराणसी, बटेश्वर महादेव मंदिर आगरा, गोपेश्वर महादेव मंदिर मथुरा वृंदावन, दुग्धेश्वरनाथ मंदिर गाजियाबाद, पृथ्वीनाथ शिवधाम गोंडा, औघड़नाथ महादेव मंदिर मेरठ, परमट मंदिर कानपुर, श्री गौरी शंकर मंदिर कन्नौज, बिल्वेश्वर महादेव मंदिर मेरठ, रामेश्वरम महादेव मंदिर मिर्जापुर, पुरा महादेव मंदिर बागपत और गढ़ मुक्तेश्वर धाम हापुड़ के शिवमंदिर शिवभक्तों के स्वागत के तैयार हैं।
सुकर्मा योग का अद्भुत संयोग
पंडित अवधेश मिश्र शास्त्री के अनुसार, देवाधिदेव महादेव भगवान शिव का प्रिय मास (महीना) श्रावण यानी सावन और उसमें भी दिन सोमवार खास होता है। श्रावण के पहले सोमवार पर तीन अगस्त के दिन उत्तराभाद्रपद नक्षत्र, सुकर्मा योग का अद्भुत संयोग है। सुकर्मा योग शुभ और मंगलकारी होता है। इसमें भगवान शिव की स्तुति करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। भोलेबाबा के शिवलिंग पर दूध-जल, बेलपत्र, भांग, धतुरा अर्पित करके मनोकामना पूर्ति की याचना करनी चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / Dr. Ashish Vashisht