संवाद करते मेघ काव्यात्मक कृति का शिलांग में लोकार्पण

 


प्रयागराज, 03 अप्रैल (हि.स.)। मेघालय साहित्यिक मंच के तत्वावधान में बंगिया साहित्य परिषद्, शिलांग (मेघालय) के सभागार में गत दिवस संवाद करते मेघ काव्यात्मक कृति का लोकार्पण किया गया।

भाषाविज्ञानी आचार्य पं पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने बुधवार को बताया कि पुस्तक में लिखी भूमिका का पाठ संस्था की उपाध्यक्षा और संग्रह की सहसम्पादिका नीता शर्मा ने किया था। कार्यक्रम में पूर्वोत्तर पर्वतीय विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग के प्रो.भरत प्रसाद त्रिपाठी, प्रो.आनन्द दीक्षित, रामकृष्ण मिशन शिक्षा विभाग के प्रमुख ब्रह्मचारी वैराग्यचेतन महाराज, पद्मश्री से सम्मानित मेघालय की जानी मानी साहित्यकार सिल्वि पाशा, समाजसेवी तथा हिन्दी के प्रचार में जुटे बिमल बजाज जैसे विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि सर्जनपीठ प्रयागराज की ओर से प्रकाशित काव्यकृति संवाद करते मेघ प्राकृतिक प्रान्त शिलांग (मेघालय) की पंद्रह कवियित्रियों की 75 कविताओं का साझा काव्य संकलन है। जिसका गत दिवस पूर्वोत्तर पर्वतीय विश्वविद्यालय, शिलांग के कुलपति प्रो. प्रभाशंकर शुक्ल ने बंगिया साहित्य परिषद्, शिलांग के सभागार में लोकार्पण किया था।

प्रो.शुक्ल ने कहा संवाद करते मेघ पुस्तक में मेघालय की स्वनामधन्य पन्द्रहों कवियित्रियों की काव्यात्मक प्रतिभा से अवगत होकर मैं गर्व का अनुभव कर रहा हूं। मैं इसे अहिन्दी भाषा भाषी राज्य मे महिलाओं की महान उपलब्धि मानता हूं और इस संग्रह में सम्मिलित समस्त कवयित्रियों को बधाई और शुभकामना देता हूं।

संस्था उपाध्यक्षा और संग्रह की सह सम्पादिका नीता शर्मा ने काव्य संकलन को मूर्तरूप देने का श्रेय सम्पादिका डॉ अनिता पण्डा अन्वी को देते हुए संकलन का पूर्ण सफ़रनामा प्रस्तुत किया। सभी अतिथियों ने काव्य संग्रह की प्रशंसा करते हुए पूर्वोत्तर में बसे जनजातीय प्रदेश में हिन्दीभाषी महिलाओं द्वारा इसे हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए उत्कृष्ट एवं अभूतपूर्व कदम बताया। मंच पर तकनीकी कार्यों मे विशेष योगदान के लिए अनन्या शर्मा और संकलन की बाल कवियित्री अस्मी बांगिया को प्रशस्ति पत्र प्रदान किये गये। कार्यक्रम में संस्था की मुख्य सचिव ने काव्यपाठ एवं समारोह का संचालन आलोक सिंह ने किया।

हिन्दुस्थान समाचार/विद्या कान्त/राजेश