संपूर्ण हिन्दू समाज को होना चाहिए समरस : स्वान्त रंजन

 

स्वान्त रंजन ने किया समरस समाज विकसित भारत का आधार पुस्तक का लोकार्पण

लखनऊ, 02 मार्च (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वान्त रंजन ने सोमवार को महामना मालवीय विद्या मंदिर के सभागार में 'समरस समाज— विकसित भारत की ओर' पुस्तक का लोकार्पण किया। इस पुस्तक को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य अशोक बेरी और डा. हिमांशु अग्रवाल ने लिखी है। इस अवसर पर बावन मंदिर अयोध्या के महंत वैदेही वल्लभ शरण महाराज और सामाजिक समरसता गतिविधि के प्रान्त प्रमुख राज किशोर प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वान्त रंजन ने कहा कि सामाजिक विषमता मानसिक बीमारी है। इसे दूर करने की आवश्कता है तभी समाज समरस होगा। उन्होंने कहा संपूर्ण हिन्दू को समाज समरस होना चाहिये, जातियां होंगी लेकिन किसी दूसरी जाति से दुश्मनी नहीं चाहिए। हम सब हिन्दू समाज के अंग हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य अशोक बेरी ने कहा समाजिक समरसता से ही देश का भविष्य उज्जवल होगा हम अपने परिवार मोहल्ले में समरसता का संस्कार देना है। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता निरंतर साधना का विषय है। इसकी आवश्यकता समाज के प्रत्येक स्तर पर रहती है। उन्होंने कहा समाज को जोड़ने की प्रक्रिया व्यवहार,सेवा और सतत संवाद से आगे बढ़ती है। जब समाज के विभिन्न घटक एक दूसरे को स्वीकार करते हुए आगे बढ़ते हैं तब राष्ट्र की सामूहिक शक्ति स्वत: प्रकट होती है। इस दृष्टि से समरस समाज का निर्माण किसी तात्कालिक उद्देश्य की पूर्ति नहीं बल्कि दीर्घकालिक राष्ट्रीय दृष्टि का अभिन्न अंग है।

डा. हिमांशु अग्रवाल ने कहा कि विकसित भारत का निर्माण केवल नीतियों,योजनाओं या संरचनाओं से नहीं होता,बल्कि नागरिकों के आपसी संबंधों,विश्वास और सहयोग से होता है। इसका उद्देश्य सामाजिक जीवन को किसी एक सीमित दृष्टिकोण में बांधना नहीं बल्कि उस व्यापक चेतना को रेखांकित करना है जो समाज को जोड़ती है और राष्ट्र को सुदृढ़ बनाती है।

सामाजिक समरसता गतिविधि के प्रान्त प्रमुख राज किशोर ने बताया कि यह पुस्तक समरस समाज विकसित भारत का आधार इस दृष्टि को केन्द्र में रखकर लिखी गयी है। यह पुस्तक समरसता को केवल एक नैतिक आदर्श के रूप में नहीं बल्कि विकसित भारत की संकल्पना से जुड़ी एक अनिवार्य आवश्यकता के रूप में प्रस्तुत करता है। इस पुस्तक में भारतीय परम्परा के भीतर विकसित सामाजिक चेतना के विविध आयामों को संतुलित रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बावन मंदिर अयोध्या के महंत वैदेही वल्लभ शरण महाराज ने कहा कि आज संघ नहीं होता तो समाज बट गया होता, संघ समाज को समरसता की ओर ले जा रहा है।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक कौशल, क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुभाष, वरिष्ठ प्रचारक वीरेन्द्र सिंह, अशोक केडिया यशोदा नन्दन नरेंद्र भदौरिया, नरेंद्र सिंह, अपर्णा यादव पवन सिंह चौहान प्रशांत भाटिया प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन