बिठूर की ऐतिहासिक धरा को नमन, सांस्कृतिक गौरव को नई चेतना : मंत्री योगेंद्र उपाध्याय

 


कानपुर, 26 फरवरी (हि.स.)। बिठूर की ऐतिहासिक धरा को नमन किया। बिठूर अपनी सांस्कृतिक पहचान और पुराने गौरव के पथ पर आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विकास और प्रगति का नया दौर चल रहा है। ऐसे आयोजनों से बिठूर के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक गौरव को नई चेतना मिली है। महोत्सव से कलाकारों को मंच मिलेगा और सांस्कृतिक परम्परा व विरासत अक्षुण्ण बनी रहेगी। यह बातें गुरुवार को प्रभारी मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कही।

तीर्थनगरी बिठूर ने गुरुवार शाम एक बार फिर अपनी सांस्कृतिक पहचान को जीवंत कर दिया। तीन दिवसीय बिठूर महोत्सव का शुभारम्भ मुख्य अतिथि प्रभारी मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, सांसद रमेश अवस्थी, महापौर प्रमिला पांडेय, विधायक अभिजीत सांगा, विधायक नीलिमा कटियार, विधायक सरोज कुरील, एमएलसी सलिल बिश्नोई, जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह, सीडीओ दीक्षा ने स्वस्तिवाचन के बीच दीप प्रज्ज्वलन कर किया।

विधायक अभिजीत सिंह सांगा ने कहा कि बिठूर ऋषियों-मुनियों की धरा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बिठूर विकास के नए प्रतिमान गढ़ रहा है।

दीप प्रज्ज्वलन के बाद अवधेश सिंह बावरा द्वारा रचित “जय हो धरा बिठूर, है धन्य धरा जहां कल-कल बहती मां गंगा धारा” शीर्षक बिठूर गीत की प्रस्तुति प्रणव सिंह ने की। गीत में बिठूर की ऐतिहासिक विरासत और आस्था का सशक्त चित्रण था।

इसके बाद भोपाल कत्थक समिति से जुड़ी प्रख्यात नृत्यांगना अनुराधा सिंह ने शास्त्रीय नृत्य की सधी प्रस्तुति दी। मंच पर भाव, लय और ताल का ऐसा संगम दिखा कि कुछ क्षणों के लिए पूरा परिसर शास्त्रीय रंग में डूब गया। उनकी भक्तिकटक और कलियामर्दन से जुड़ी प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया।

शाम ढलते ही मंच पर यूफोरिया बैंड की एंट्री के साथ कार्यक्रम का स्वरूप बदल गया। प्रमुख गायक पलाश सेन ने दर्शकों से संवाद करते हुए प्रस्तुति की शुरुआत की। जैसे ही “कभी आना तू मेरी गली” की धुन गूंजी, युवा दर्शक खड़े हो गए। मायरी और “आगे जाने राम क्या होगा” के दौरान पूरा पंडाल सुर में सुर मिलाता दिखा। मां तुझे सलाम गीत ने देशभक्ति से परिपूर्ण कर दिया।

गिटार, ड्रम और लाइव बैंड की ऊर्जा ने माहौल को रॉक कॉन्सर्ट में बदल दिया। रोशनी से चमकते प्रांगण में हजारों लोग एक साथ झूमते नजर आए। पलाश सेन ने बीच-बीच में बिठूर की ऐतिहासिक धरती का उल्लेख कर दर्शकों से सीधा जुड़ाव बनाया। कार्यक्रम देर रात तक उत्साह के साथ चलता रहा।

66 किस्म के फूलों ने खींचा ध्यान

महोत्सव परिसर में उद्यान विभाग की पुष्प प्रदर्शनी आकर्षण का बड़ा केंद्र रही। 66 प्रजातियों के फूलों ने रंगों की छटा बिखेरी। रेननकुलस, पिटूनिया, एस्टर, डेजी, फ्लोक्स, हेलीक्राइसस (पेपर फ्लॉवर), लाइनम और स्टॉक सहित कई प्रजातियों से बनी सजावटी आकृतियों के साथ लोगों ने सेल्फी लीं।

35 स्टॉलों पर सजी परम्परा व आधुनिकता

विभिन्न विभागों और स्वयं सहायता समूहों सहित कुल 35 स्टॉल लगाए गए हैं। सजावटी सामग्री, रेडीमेड गारमेंट, पूजन सामग्री, लकड़ी के खिलौने, मिट्टी के बर्तन, पॉटरी, माटी कला उत्पाद, मसाले, ड्राई फ्रूट्स, कालीन और दरी की बिक्री ने बाजार जैसा माहौल बना दिया।

रक्षा उत्पादों की प्रदर्शनी ने युवाओं का ध्यान खींचा। ऑर्डिनेंस फैक्ट्री की बुलेटप्रूफ जैकेट, कॉम्बैट किट, मल्टी पर्पज किट, विशेष जूते और पानी शुद्धिकरण हाइड्रेशन सिस्टम को लोग करीब से देखते नजर आए। ग्लाइडर्स इंडिया के उत्पाद और आईआईटी की एआई प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप