सहकार भारती का दो दिवसीय अभ्यास वर्ग शुरू, स्वांत रंजन बोले- भारत की समृद्ध परंपरा को समझने की जरूरत

 

लखनऊ। सहकारिता के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था सहकार भारती का दो दिवसीय प्रदेश अभ्यास वर्ग एसआर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट, सीतापुर रोड, लखनऊ के स्वामी विवेकानंद सभागार में शुरू हुआ। उद्घाटन सत्र का शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख (अवध प्रांत) स्वांत रंजन ने दीप प्रज्वलित कर किया। अभ्यास वर्ग में लखनऊ समेत आसपास के कई जिलों से सहकार भारती के कार्यकर्ता और पदाधिकारी शामिल हुए।

सहकारिता की परंपरा भारत में सदियों पुरानी: डॉ. अरुण कुमार सिंह
सहकार भारती के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार सिंह ने कहा कि भारत में सहकारिता की भावना और परंपरा सदियों से रही है। वर्ष 1904 में सहकारिता को अधिनियम के रूप में स्वीकार किए जाने के बाद सहकारी समितियों के गठन का सिलसिला शुरू हुआ। इनका उद्देश्य ऐसे लोगों को आर्थिक सहयोग देना था, जिनके पास व्यापार या उद्यम शुरू करने के लिए पर्याप्त धन नहीं था।

उन्होंने कहा कि आपातकाल के बाद वर्ष 1978 में संघ के प्रचारक लक्ष्मणराव इनामदार ने सहकारिता को बढ़ाने और इस क्षेत्र में आई गिरावट को दूर करने पर जोर दिया। इसी विचार से प्रेरित होकर सहकार भारती ने संस्कारवान और समर्पित कार्यकर्ता तैयार करने का काम आगे बढ़ाया।

डॉ. अरुण कुमार सिंह ने कहा कि सहकार भारती का उद्देश्य केवल आर्थिक सहयोग देना नहीं, बल्कि व्यक्ति निर्माण भी है। कार्यकर्ताओं को अपने आचरण और विचारों में लगातार सुधार करते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि आर्थिक सहयोग से समृद्धि आती है और संगठन समाज को स्वावलंबी बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

युवाओं को रोजगार देने वाला बनने की जरूरत: पवन सिंह चौहान
विधान परिषद सदस्य एवं एसआर ग्रुप के चेयरमैन पवन सिंह चौहान ने युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने गांव के लोगों के खेतों में सरसों की बुवाई से शुरुआत की थी और आज वह 18 अलग-अलग व्यवसायों से जुड़े हैं।

उन्होंने बताया कि महज 700 रुपये से शुरू हुआ उनका प्रयास आज 7,000 विद्यार्थियों को शिक्षा देने वाले संस्थान के रूप में विकसित हो चुका है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी हासिल करना नहीं होना चाहिए। युवाओं को रोजगार पाने के साथ दूसरों को रोजगार देने वाला बनने का भी लक्ष्य रखना चाहिए।

पवन सिंह चौहान ने कहा कि बिना संस्कार के सहकार संभव नहीं है। इसी उद्देश्य से संस्थान में विद्यार्थियों को संस्कारों से जोड़ने के लिए संस्कृत की प्रार्थना भी कराई जाती है।

भारत की संस्कृति और परंपरा को साथ लेकर बढ़ना होगा: स्वांत रंजन
मुख्य वक्ता स्वांत रंजन ने कहा कि सहकार भारती आर्थिक क्षेत्र में काम कर रही है और इसके कार्यकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण वर्ग का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि भारत को लंबे समय तक अशिक्षित और गरीब देश के रूप में प्रस्तुत किया गया, जबकि ऐतिहासिक प्रमाण बताते हैं कि अंग्रेजों के आने से पहले देश में शिक्षा की मजबूत व्यवस्था थी।

उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक अध्ययनों और अंग्रेजों के गजेटियर में भी भारत की शिक्षा व्यवस्था का उल्लेख मिलता है। कई क्षेत्रों में गांव-गांव पाठशालाएं थीं, जिन्हें स्थानीय समाज मिलकर चलाता था। इन पाठशालाओं में अलग-अलग जाति और समुदाय के लोग शिक्षा प्राप्त करते थे।

स्वांत रंजन ने कहा कि भारत कभी गरीब देश नहीं रहा और लंबे समय तक आर्थिक शोषण के बावजूद वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत का महत्वपूर्ण योगदान रहा। देश को फिर से समृद्ध और स्वावलंबी बनाने के लिए समाज के सामान्य वर्ग को आगे बढ़ाना होगा। इसके साथ भारत की संस्कृति, परंपरा और धर्मबोध को लेकर आगे बढ़ने की जरूरत है।

कार्यकर्ता अपने आचरण से पेश करें उदाहरण
स्वांत रंजन ने कार्यकर्ताओं से कहा कि केवल उपदेश देने से बदलाव नहीं आता। इसके लिए अपने आचरण से उदाहरण प्रस्तुत करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मिल-जुलकर काम करना, एक-दूसरे पर विश्वास रखना और सामूहिक विचार-विमर्श के बाद निर्णय लेना संगठन की कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उन्होंने सहकारिता के आर्थिक क्षेत्र में पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया। कहा कि समिति को बेहतर तरीके से चलाने के लिए सभी सदस्यों की बात सुननी चाहिए। सहकार भारती सरकारी संस्था नहीं, बल्कि सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाला संगठन है। इसलिए समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलना और सभी से संवाद बनाए रखना जरूरी है।

पहले दिन चार अन्य सत्र भी हुए
अभ्यास वर्ग के पहले दिन उद्घाटन सत्र के अलावा चार अन्य सत्र आयोजित किए गए। इनमें लखनऊ विभाग के साथ लखनऊ जिला, लखनऊ महानगर, सीतापुर, लखीमपुर, रायबरेली, उन्नाव और हरदोई के कार्यकर्ताओं के अलावा प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी शामिल हुए।

कार्यक्रम में अशोक कुमार शुक्ला, शिवेंद्र प्रताप सिंह, रमाशंकर जायसवाल, हिरेन्द्र मिश्र, सुरेंद्र सिंह चौहान, संजय सिंह चौहान, राम कुमार दीक्षित और पीयूष कुमार मिश्रा समेत अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।