विश्व में शांति स्थापना का प्रमुख केंद्र बन सकता है भारत : डॉ. इंद्रेश कुमार
लखनऊ, 17 अक्टूबर (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. इंद्रेश कुमार ने शनिवार को लखनऊ के संगीत नाटक अकादमी में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि 'भारत में सभी धर्मों का सम्मान है। इसलिए यहां सभी धर्मों मिलकर चलते हैं। देश में कट्टरता या लड़ाकू सोच नहीं चल सकती। उन्होंने कहा कि विश्व में शांति स्थापना का प्रमुख केंद्र भारत ही बन सकता है। दुनिया में जितने भी धर्म हैं उनके प्रार्थना करने का तरीका भले ही अलग हो, पर सभी एक ही ऊपर वाले से अरदास करते हैं। जिस प्रकार माता-पिता सभी संतानों से समान ममता रखते हैं। उसी प्रकार ईश्वर भी सबको समभाव से देखता है।
वह धर्म संस्कृति संगम अवध प्रांत की ओर से 'राष्ट्र की उन्नति में समता, समानता, सामाजिक समरसता एवं सद्भाव का महत्व' विषय पर आयोजित संगोष्ठी में बोल रहे थे। अपने संबोधन में डॉ. इंद्रेश कुमार ने सामाजिक समरसता और देश की एकता पर बल दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अयोध्या बावन मंदिर के पीठाधीश्वर वैदेही बल्लभ शरण महाराज ने की। अन्य वक्ताओं में केजीएमयू की कुलपति पद्मश्री प्रो. सोनिया नित्यानंद, अयोध्या के धोबी मंदिर के महंत छत्तरदास महाराज, अयोध्या के रविदास मंदिर के महंत अवधेश दास महाराज एवं निराला दास महाराज एवं अन्य संतों ने अपने विचार व्यक्त किया।
प्रांत सद्भाव प्रमुख राजेंद्र ने कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रस्तुत रखी। राष्ट्रीय मंत्री अरुण सिंह बौद्ध ने आभार व्यक्त किया। स्वागत भाषण राष्ट्रीय महामंत्री राजेश लांबा ने किया। गोष्ठी में साहू मंदिर के महंत संजीव दास, भंते सील रत्न, मनीष वर्मा एवं महिपाल सिंह उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन