संघ शताब्दी वर्ष में संगठन विस्तार और सामाजिक समरसता पर जोर : भवानी भीख

 


कानपुर, 19 मार्च (हि.स.)। संघ शताब्दी वर्ष में संगठन विस्तार के साथ समाज की सज्जन शक्ति को सद्भाव और समरसता के लिए संगठित करना प्रमुख लक्ष्य है। इसके लिए देश भर में व्यापक स्तर पर कार्यक्रमों और अभियानों का संचालन किया जा रहा है। जिनमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। यह बातें गुरुवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कानपुर प्रांत के प्रांत संघचालक भवानी भीख ने कही।

आज बीएनएसडी शिक्षा निकेतन परिसर बेनाझाबर अंतर्गत श्रीकांत जोशी सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए भवानी भीख ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक 13 से 15 मार्च को हरियाणा के पट्टीकल्याणा (समालखा) में हुई। बैठक में देश भर से लगभग 1487 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक से लौटकर आए प्रांत संघचालक भवानी भीख ने बताया कि इसमें संघ एवं समविचारी संगठनों ने पिछले वर्ष के कार्यों की समीक्षा के साथ आगामी वर्ष की कार्ययोजना प्रस्तुत की।

उन्होंने बताया कि शताब्दी वर्ष के अवसर पर दो प्रमुख आयामों पर कार्य किया जा रहा है—संगठन विस्तार और सामाजिक समरसता। इसी क्रम में देशभर में गृह संपर्क अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत अब तक करोड़ों घरों और लाखों गांवों तक पहुंच बनाई गई है। केरल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां हजारों मुस्लिम और ईसाई परिवारों से संपर्क स्थापित कर सामाजिक समरसता का संदेश दिया गया।

प्रांत संघचालक ने बताया कि देश भर में 36 हजार से अधिक स्थानों पर हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया जा चुका है, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी रही। कानपुर प्रांत में भी शताब्दी वर्ष के अंतर्गत 673 पथ संचलन आयोजित किए गए, जिनमें एक लाख से अधिक स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में शामिल हुए। गृह संपर्क अभियान के तहत प्रांत में 35 लाख से अधिक घरों तक पहुंच बनाई गई और लाखों की संख्या में साहित्य का वितरण किया गया।

उन्होंने बताया कि प्रांत में अब तक 1900 से अधिक हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें पुरुषों के साथ ही बड़ी संख्या में महिलाओं की भी सक्रिय भागीदारी रही। इन आयोजनों में संघ के साथ-साथ समाज के विभिन्न क्षेत्रों के विद्वानों ने भी अपने विचार रखे, जिससे सामाजिक संवाद को बल मिला।

बैठक में संगठनात्मक ढांचे में बदलाव पर भी विचार किया गया। वर्तमान में देश में 46 प्रांतों की व्यवस्था को भविष्य में 80 से अधिक संभागों में पुनर्गठित करने की योजना पर चर्चा हुई, जिसमें कानपुर प्रांत के अंतर्गत कानपुर और झांसी दो संभाग बनाए जाने का प्रस्ताव है।

प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ. अनुपम ने बताया कि शताब्दी वर्ष के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के कानपुर प्रवास के दौरान गृह संपर्क अभियान में सहभागिता के साथ विभिन्न कार्यक्रमों में संवाद किया गया।

उन्होंने बताया कि गुरु तेग बहादुर के 350वें बलिदान दिवस पर देश भर में 2000 से अधिक कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनमें लाखों लोगों ने भाग लिया। इसके अलावा वंदेमातरम की 150वीं वर्षगांठ भी उत्साहपूर्वक मनाई गई। आगामी समय में संत रविदास जयंती के 650वें प्राकट्य वर्ष पर भी विभिन्न कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।

अंत में उन्होंने बताया कि संघ के कार्य में निरंतर विस्तार हो रहा है। देश भर में शाखाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वहीं कानपुर प्रांत में भी शाखाओं और सेवा कार्यों में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि विजयादशमी 2026 तक शताब्दी वर्ष के अंतर्गत कई और कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनके माध्यम से समाज में समरसता और संगठन की भावना को और मजबूत किया जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप