स्वस्थ लोकतंत्र के लिए सुदृढ़ कानून व्यवस्था आवश्यक : डॉ. रामाशीष राय

 


लखनऊ, 03 जून (हि.स.)। राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामाशीष राय ने प्रदेश की वर्तमान कानून व्यवस्था पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बुधवार को जारी अपने बयान में कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सफलता का आधार जनता की सुरक्षा, न्याय व्यवस्था में विश्वास तथा कानून का निष्पक्ष क्रियान्वयन होता है। यदि आम नागरिक स्वयं को असुरक्षित महसूस करने लगे और घटनाओं की निष्पक्ष जांच पर सवाल उठने लगें, तो यह लोकतंत्र के लिए चिंताजनक स्थिति है।

डॉ. राय ने हाल ही में वाराणसी एवं प्रयागराज में हुई घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी न्यायिक जांच कराई जानी चाहिए, ताकि घटना के सभी पहलुओं की सच्चाई सामने आ सके और जनता के मन में उठ रहे सवालों का समाधान हो सके। उन्होंने कहा कि किसी भी संवेदनशील मामले में केवल प्रशासनिक जांच पर्याप्त नहीं होती, बल्कि न्यायिक जांच से जनता का विश्वास मजबूत होता है और न्याय होते हुए दिखाई भी देता है।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि उत्तर प्रदेश में लागू की गई पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था की कार्यप्रणाली और उसके प्रभावों का भी व्यापक मूल्यांकन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से लागू की गई किसी भी व्यवस्था का समय-समय पर आकलन होना आवश्यक है। यदि कहीं पर प्रशासनिक संतुलन, जवाबदेही या जनसुनवाई की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है तो सरकार को उस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

डॉ. राय ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में पुलिस और प्रशासन की भूमिका जनता के प्रति जवाबदेह तथा संवेदनशील होनी चाहिए। कानून व्यवस्था केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों में सुरक्षा की भावना उत्पन्न करना, निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करना और प्रशासन के प्रति विश्वास कायम रखना भी उसका महत्वपूर्ण दायित्व है।

राष्ट्रीय लोकदल प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि प्रदेश की कानून व्यवस्था निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रभावी हो। जनता को न्याय मिलने का विश्वास होना चाहिए तथा शासन-प्रशासन को भी ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए जिसमें प्रत्येक नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस कर सके।

उन्होंने प्रदेश सरकार से आग्रह किया कि प्रयागराज की घटना की न्यायिक जांच कराई जाए, कानून व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर व्यापक समीक्षा की जाए तथा पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था सहित सभी प्रशासनिक व्यवस्थाओं का निष्पक्ष मूल्यांकन कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएं, ताकि प्रदेश में सुशासन और जनविश्वास को और अधिक मजबूत किया जा सके।

हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा