पारंपरिक स्वाद को आधुनिक पहचान दे रही है बाटीपुर रेस्टोरेंट संचालिका रिया पाण्डेय

 






-प्रदेश के पारंपरिक खानपान को पर्यटन और रोजगार से जोड़ने पर दिया गया जोर

गोरखपुर, 02 अगस्त (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के समृद्ध खानपान, क्षेत्रीय व्यंजनों और पारंपरिक स्वाद को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से रविवार काे आयोजित ‘टेस्ट ऑफ उत्तर प्रदेश’ कार्यक्रम में बाटीपुर रेस्टोरेंट की संचालिका रिया पाण्डेय की सहभागिता विशेष आकर्षण का केंद्र रही। स्थानीय स्वाद को आधुनिक प्रस्तुतिकरण और व्यावसायिक दृष्टिकोण से जोड़ने की उनकी पहल को अतिथियों एवं खाद्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने सराहा।

कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जनपदों की पाक-परंपराओं, स्थानीय खाद्य उत्पादों, पौष्टिकता, गुणवत्ता, ब्रांडिंग और पर्यटन की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि उत्तर प्रदेश का प्रत्येक क्षेत्र अपने विशिष्ट स्वाद और खानपान के लिए जाना जाता है। आवश्यकता इन पारंपरिक व्यंजनों को सुव्यवस्थित प्रचार, बेहतर पैकेजिंग और आधुनिक विपणन के माध्यम से व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की है।

रिया पाण्डेय ने बाटीपुर रेस्टोरेंट के माध्यम से पूर्वांचल की पारंपरिक भोजन-संस्कृति को जीवंत बनाए रखने के अपने प्रयासों से कार्यक्रम में विशिष्ट छाप छोड़ी। उनका मानना है कि मिट्टी की सौंधी सुगंध और घर-आंगन के स्वाद से जुड़े व्यंजनों को आधुनिक परिवेश में प्रस्तुत कर नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ा जा सकता है। पारंपरिक पकवानों की मौलिकता बनाए रखते हुए स्वच्छता, गुणवत्ता और आकर्षक प्रस्तुति पर दिया जा रहा उनका जोर स्थानीय खाद्य व्यवसाय के लिए प्रेरक उदाहरण बन रहा है।

केंद्रीय राज्यमंत्री कमलेश पासवान ने कहा कि ‘एक जनपद–एक व्यंजन’ जैसी संकल्पना स्थानीय व्यंजनों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के साथ रोजगार, उद्यमिता और पर्यटन को भी नई गति प्रदान कर सकती है। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने बदलते समय में पारंपरिक खानपान को शोध, तकनीक और नवाचार से जोड़ने की आवश्यकता बताई।

कार्यक्रम में होटल व्यवसायियों, खाद्य उद्यमियों, शेफ, रेस्तरां संचालकों और विभिन्न फूड ब्रांडों ने भाग लिया। पारंपरिक व्यंजनों के संरक्षण और खाद्य क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले प्रतिनिधियों को सम्मानित भी किया गया। आयोजन ने यह संदेश दिया कि स्थानीय भोजन केवल स्वाद नहीं, बल्कि किसी क्षेत्र की संस्कृति, स्मृति और पहचान का सशक्त माध्यम होता है।

हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय