फर्रुखाबाद: जलस्तर घटते ही गंगा ने दिखाया रौद्र रूप,नदी किनारे कटान से कई झोपड़ियां पानी में समाईं, मकानों पर मंडरा रहा खतरा
फर्रुखाबाद, 01 सितम्बर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में गंगा का जलस्तर लगातार घट रहा है, लेकिन पानी कम होते ही नदी ने किनारों पर कटान तेज कर दिया है। अमृतपुर तहसील क्षेत्र के करनपुर घाट और मंझा की मड़ैया में मंगलवार को गंगा की धार तेजी से जमीन काट रही है। कई झोपड़ियां कटकर नदी में समा चुकी हैं, जबकि कई मकान और झोपड़ियां अब कटान की जद में पहुंच गए हैं। नदी किनारे बसे परिवारों में दहशत का माहौल है। ग्रामीण अपने आशियाने बचाने के लिए दिन-रात निगरानी करने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई दिनों से बाढ़ का पानी गांवों और आसपास के क्षेत्रों में परेशानी का कारण बना हुआ था। जलस्तर घटने के बाद लोगों को राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन गंगा का कटान तेज होने से नई मुसीबत खड़ी हो गई। नदी लगातार किनारे की जमीन को काटकर अपने साथ बहा रही है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि कटान की रफ्तार इसी तरह जारी रही तो आने वाले दिनों में कई और घर इसकी चपेट में आ सकते हैं।
करनपुर घाट में कटान आबादी के करीब
यहां करनपुर घाट में गंगा का कटान आबादी के बेहद करीब पहुंच गया है। ग्रामीणों के अनुसार खुशीराम की झोपड़ी कटकर गंगा में समा चुकी है। आशियाना उजड़ने के बाद उनके परिवार के सामने रहने का संकट खड़ा हो गया। मजबूरी में सड़क किनारे झोपड़ी डालकर परिवार गुजर-बसर कर रहा है।
ग्रामीण सत्यवती ने बताया कि खुशीराम की झोपड़ी कट चुकी है और अब वह सड़क किनारे झोपड़ी डालकर रहने को मजबूर हैं। धर्मेंद्र की झोपड़ी भी गंगा के बेहद करीब पहुंच गई है। ग्रामीणों के अनुसार सुभाष और अवधेश के मकानों पर भी कटान का खतरा मंडरा रहा है।
करनपुर घाट निवासी शिवाकांत ने बताया कि गंगा के कटान में उनकी दो झोपड़ियां कट चुकी हैं। बाढ़ के दौरान खेती को पहले ही भारी नुकसान हो चुका है। मक्का और गेहूं की फसल खराब होने के बाद अब झोपड़ियां कटने से परिवार के सामने रहने की समस्या खड़ी हो गई है। राकेश ने बताया कि गंगा लगातार तेजी से कटान कर रही है। नदी का रुख देखकर ग्रामीणों में भय बना हुआ है।
मंझा की मड़ैया में भी गंगा का कटान ग्रामीणों के लिए परेशानी का बड़ा कारण बना हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार यहां कई झोपड़ियां कटकर गंगा में समा चुकी हैं। सोनपाल ने बताया कि करीब आठ से 10 झोपड़ियां कट चुकी हैं। ब्रह्मपाल ने बताया कि गंगा लगातार कटान कर रही है और कई परिवार इसकी चपेट में आ चुके हैं।
मंझा निवासी माधुरी ने बताया कि गंगा के कटान में उनकी दो झोपड़ियां गिर चुकी हैं। झोपड़ियां कटने के बाद परिवार के सामने रहने का संकट खड़ा हो गया। अब तिरपाल डालकर किसी तरह गुजारा करना पड़ रहा है। घर का सामान भी सुरक्षित रखने में परेशानी हो रही है। राजीव ने बताया कि उनकी भी दो झोपड़ियां गंगा के कटान में कट चुकी हैं। ग्रामीणों को हर समय अपने आशियाने के नदी में समाने का डर सता रहा है।
बाढ़ के बाद फसल बर्बाद, अब आशियाने बचाने की चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि इस बार बाढ़ ने पहले ही खेती को भारी नुकसान पहुंचाया है। खेतों में खड़ी मक्का और गेहूं की फसल पानी में खराब हो गई। पशुओं के चारे की समस्या भी बनी हुई है। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि जलस्तर कम होने के बाद हालात सामान्य होंगे, लेकिन गंगा के तेज कटान ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है।
एक तरफ बाढ़ का पानी घटने से लोगों को कुछ राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ कटान के कारण जमीन लगातार गंगा में समाती जा रही है। जिन परिवारों की झोपड़ियां कट चुकी हैं, उनके सामने रहने और घरेलू सामान सुरक्षित रखने की गंभीर समस्या बनी हुई है।
कटान रोकने और प्रभावितों को राहत देने की मां
ग्रामीण सत्यवती, राकेश, नरेश, गुड्डू, धर्मेंद्र, मुनींद्र, बहादुर, शिवाकांत, माधुरी, ब्रह्मपाल, सोनपाल और राजीव ने प्रशासन से कटान प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल निरीक्षण कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा के प्रभावी इंतजाम नहीं किए गए तो कई और झोपड़ियां तथा मकान गंगा की चपेट में आ सकते हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से कटान रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने, प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने तथा जिन लोगों की झोपड़ियां कट चुकी हैं, उन्हें तत्काल राहत और आवश्यक सहायता मुहैया कराने की मांग की है।
अपर जिलाधिकारी अरुण कुमार ने बताया कि कटान रोकने के लिए कई जगह काम चल रहा है। जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है।
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हिन्दुस्थान समाचार / Chandrapal Singh Sengar