जलवायु परिवर्तन से बढ़ती गर्मी मानव अस्तित्व के लिए खतरा : प्रो. भरत राज सिंह
लखनऊ, 30 अप्रैल (हि.स.)। अप्रैल माह में अब 40–43°C तापमान के साथ झुलसाने वाली गर्मी का प्रतीक बन गया है। जलवायु परिवर्तन, समुद्री तापमान में वृद्धि, युद्ध और वेस्टर्न वेव्स के बदलते स्वरूप इसके प्रमुख कारण हैं। यदि यही प्रवृत्ति जारी रही तो तापमान 48–50°C तक पहुंच सकता है। यह मानव अस्तित्व के लिए गंभीर संकट है और अब ठोस कार्रवाई आवश्यक है। यह बातें गुरुवार को पर्यावरणविद व
महानिदेशक स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंस लखनऊ के प्रो. (डॉ) भरत राज सिंह ने कहीं।
अप्रैल माह में उत्तर भारत विशेषकर लखनऊ, दिल्ली, राजस्थान और मध्य गंगा के मैदानों में तापमान लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है। 40°C से ऊपर तापमान अब सामान्य स्थिति बनता जा रहा है।
तापमान ट्रेंड (अप्रैल अधिकतम तापमान विश्लेषण)
भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्षों में अप्रैल माह के अधिकतम तापमान में स्पष्ट वृद्धि दर्ज की गई है:
2015 → 40.7°C
2016 → 43.1°C
2017 → 41.8°C
2018 → 40.7°C
2019 → 44.6°C (उच्चतम रिकॉर्ड स्तर)
2020 → 38.8°C (लॉकडाउन प्रभाव - अस्थायी गिरावट)
2021 → 41.9°C
2022 → 43.0°C
2023 → 39.0°C
2024 → 41.0°C
2025 → 42.0°C
2026 → 43.0°C+ (27 अप्रैल तक)
तापमान ट्रेंड रेटिंग (विश्लेषण आधारित)
अस्थायी गिरावट वर्ष : 2020 (कोविड-19 प्रभाव)
उच्च तीव्रता गर्मी वर्ष : 2019, 2022, 2026
स्थिर उच्च तापमान श्रेणी : 2021, 2024, 2025
दीर्घकालिक प्रवृत्ति : लगातार वृद्धि
यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि तापमान में गिरावट केवल अस्थायी रही, जबकि दीर्घकालिक प्रवृत्ति लगातार बढ़ोतरी की ओर है।
2020 में कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान औद्योगिक गतिविधियों और प्रदूषण में कमी के कारण तापमान में अस्थायी गिरावट दर्ज हुई थी, लेकिन गतिविधियां पुनः शुरू होते ही तापमान फिर बढ़ने लगा।
रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य-पूर्व संघर्षों के दौरान भी वैश्विक कार्बन उत्सर्जन और ऊर्जा खपत बढ़ने से तापमान वृद्धि को बढ़ावा मिला है।
पश्चिमी विक्षोभ के बदलते स्वरूप के कारण अब अचानक वर्षा, ओलावृष्टि और उसके बाद तेज हीटवेव जैसी स्थितियां उत्पन्न हो रही हैं, जिससे कृषि उत्पादन विशेषकर गेहूं प्रभावित हो रहा है और किसानों की आय पर असर पड़ रहा है।
शहरी क्षेत्रों में “हीट आइलैंड इफेक्ट” के कारण कंक्रीट संरचनाओं और हरियाली की कमी से तापमान ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक बना रहता है, जिससे रात में भी तापमान 30°C से ऊपर रहता है।
यदि वर्तमान प्रवृत्ति जारी रही तो 2026–2030 के बीच लंबे समय तक हीटवेव, जल संकट, भूजल स्तर में गिरावट, ऊर्जा मांग में वृद्धि और आर्थिक प्रभाव जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। जीडीपी में 4–6 प्रतिशत तक संभावित कमी की चेतावनी भी दी गई है।
समाधान सुझाव :
वृक्षारोपण और वन संरक्षण
नवीकरणीय ऊर्जा (सौर एवं पवन) को बढ़ावा
वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण
शहरी हरियाली और स्मार्ट प्लानिंग
जन-जागरूकता और पर्यावरण आंदोलन
लेख में स्पष्ट किया गया है कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की समस्या नहीं बल्कि वर्तमान का गंभीर संकट बन चुका है और यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह मानव जीवन के लिए अस्तित्वगत खतरा बन सकता है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप